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दिल्ली/NCR

जंतर-मंतर पर छात्रों से पुलिस की बदसलूकी: सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई लेवल कमेटी, CJI बोले- निर्दोष छात्रों का भविष्य नहीं होना चाहिए बर्बाद

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ पुलिस द्वारा किए गए कथित बर्बरतापूर्ण व्यवहार के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है।

मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि न्यायालय एक विशेष कमेटी का गठन कर रहा है। इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज, हाई कोर्ट के एक पूर्व चीफ जस्टिस, सीबीआई (CBI) के एक पूर्व निदेशक और पुलिस महानिदेशक (DG) स्तर के रिटायर्ड अधिकारी को शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी सभी पीड़ितों की बात सुनेगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देगी।

🛡️ निर्दोष छात्रों का भविष्य न हो बर्बाद, अपराधियों पर जारी रहेगी जांच: CJI

सुनवाई के दौरान अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और आपराधिक तत्वों के बीच स्पष्ट अंतर किया:

  • छात्रों के भविष्य की चिंता: सीजेआई सूर्य कांत ने कहा, “यह निर्दोष छात्रों के भविष्य का सवाल है, जिनके परिजन कड़ी मेहनत कर उन्हें पढ़ा रहे हैं। शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों का भविष्य बर्बाद नहीं होना चाहिए।”

  • संगीन अपराधियों पर एक्शन: सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिन पर हत्या, डकैती, रेप और पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन अपराधियों की जांच एसआईटी (SIT) करेगी।

  • बाकियों को राहत: केंद्र की ओर से स्पष्ट किया गया कि आपराधिक इतिहास वाले लोगों को छोड़कर, किसी भी अन्य आम प्रदर्शनकारी या छात्र के खिलाफ जांच को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

🕵️‍♂️ सादे कपड़ों में पुलिस की मौजूदगी पर उठे सवाल, कमेटी तय करेगी प्रोटोकॉल

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं:

  • वकीलों की दलील: वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि पुलिस ने खुद माना है कि सादी वर्दी में पुलिसकर्मी तैनात थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ऐसी स्थिति में महिलाओं के साथ बदसलूकी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

  • अनुच्छेद 142 का जिक्र: वकील वृंदा ग्रोवर ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए निर्दोष छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) तुरंत रद्द करे।

  • भविष्य के लिए गाइडलाइंस: सीजेआई ने कहा कि मौजूदा मामले में तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है, साथ ही भविष्य के लिए पुलिस की जवाबदेही, गाइडलाइंस और प्रोटोकॉल तय करने के लिए कमेटी विस्तार से विचार करेगी।

📋 कमेटी को मिलेंगी सभी सुविधाएं, सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर ने दी सहमति

कमेटी के गठन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने अहम जानकारियां दीं:

  • प्रतिष्ठित अधिकारी शामिल: सीजेआई ने बताया कि सीबीआई के एक बेहद प्रतिष्ठित पूर्व डायरेक्टर जनरल ने कमेटी का हिस्सा बनने के लिए अपनी सहमति दे दी है। इसके अलावा, एक अन्य राज्य के पूर्व डीजीपी (DGP) को भी शामिल किया जा रहा है, जिनका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है।

  • सुविधाओं की व्यवस्था: सुप्रीम कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि जांच कमेटी को सभी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी ताकि वे निष्पक्ष जांच कर अपनी सिफारिशें दे सकें।

  • अधिकारों की रक्षा: कोर्ट ने अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि जब तक कानून तोड़ने का इरादा न हो और मकसद सिर्फ अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठाना हो, तब तक ऐसे मामलों को आदतन अपराधियों द्वारा की गई हिंसा से अलग रखकर ही देखा जाना चाहिए।

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