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छत्तीसगढ़

सरगुजा में कोयला खदान में घुसा दंतैल हाथी: 1 घंटे तक मची अफरा-तफरी, पगोरिया जंगल में वन विभाग की निगरानी जारी

अंबिकापुर (छत्तीसगढ़): सरगुजा संभाग लंबे समय से मानव-हाथी द्वंद और हाथियों की सतत आवाजाही का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। झारखंड सीमा और जशपुर के रास्ते छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने वाले हाथियों के झुंड मध्य प्रदेश के शहडोल-अनूपपुर वनांचल तक पारंपरिक कॉरिडोर का उपयोग करते हैं।

शनिवार रात उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत परसा-केते में उस समय हड़कंप मच गया, जब झुंड से अलग हुआ एक विशालकाय दंतैल (लोनर) हाथी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) की कोयला खदान परिसर में प्रवेश कर गया। लगभग 1 घंटे तक हाथी खदान क्षेत्र और आसपास की सड़कों पर घूमता रहा, जिससे रात्रि पाली में कार्यरत श्रमिकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया।

🌲 पगोरिया जंगल में डटा हाथी: एलिफैंट ट्रैकर टीम कर रही सतत निगरानी

वन विभाग की मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था:

  • कक्ष क्रमांक 2126 में मौजूदगी: वन परिक्षेत्र अधिकारी एफ. चौबे के अनुसार, दंतैल हाथी वर्तमान में कोयला खदान से सटे पगोरिया जंगल के कम्पार्टमेंट नंबर 2126 में विचरण कर रहा है।

  • मुनादी और अलर्ट: वन विभाग की टीम लाउडस्पीकर के माध्यम से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार मुनादी कराकर ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और सतर्कता बरतने की हिदायत दे रही है।

  • ट्रैकिंग अभियान: एलिफैंट ट्रैकर टीम 24×7 जीपीएस और गश्त के माध्यम से हाथी की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है।

🚜 रात की शिफ्ट के दौरान घुसा हाथी: हूटर और तेज रोशनी से भड़का

घटनाक्रम और खदेड़ने की प्रक्रिया:

  • श्रमिकों में दहशत: जिस समय हाथी खदान के वर्किंग एरिया में घुसा, उस समय खदान में रात की पाली के कामगार भारी मशीनों और डंपरों के साथ काम कर रहे थे। हाथी को देखकर सभी ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली।

  • हूटर की आवाज: स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वन विभाग की रेस्क्यू टीम हूटर और रंगीन सर्च लाइट लगी गाड़ी से पहुंची थी। हूटर की तीखी आवाज और फ्लैश लाइट से हाथी असहज होकर इधर-उधर भागने लगा।

  • सुबह 4 बजे मिली सफलता: वन अमले ने कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार सुबह लगभग 4:00 बजे हाथी को खदान क्षेत्र से बाहर निकालकर सुरक्षित रूप से पगोरिया के घने जंगल की ओर खदेड़ दिया।

📢 वन विभाग द्वारा जारी महत्वपूर्ण सुरक्षा दिशा-निर्देश

ग्रामीणों और कामगारों के लिए एडवाइजरी:

  • अनावश्यक रूप से जंगल अथवा हाथी प्रभावित क्षेत्र की ओर जाने से बचें।

  • शाम ढलने के बाद जंगल के रास्तों और पगडंडियों का उपयोग पूरी तरह बंद रखें।

  • मवेशियों को बीट कुदरा और पगोरिया जंगल क्षेत्र में चराने के लिए न ले जाएं।

  • हाथी दिखाई देने पर उसके पास जाने, सेल्फी लेने या छेड़ने का प्रयास कतई न करें।

  • हाथी की कोई भी हलचल दिखने पर तत्काल नजदीकी वन चौकी या वन अधिकारियों को सूचित करें।

⚠️ क्या होता है ‘लोनर एलिफैंट’? क्यों माना जाता है अधिक आक्रामक

विशेष वन्यजीव तथ्य:

  • झुंड से अलग व्यवहार: लोनर हाथी (Loner Elephant) उन नर हाथियों को कहा जाता है जो वयस्क होने पर या आपसी संघर्ष के कारण अपने पारिवारिक झुंड से अलग होकर अकेले विचरण करते हैं।

  • अधिक आक्रामकता: झुंड में रहने वाले हाथियों की तुलना में अकेले घूमने वाले लोनर हाथी अधिक अप्रत्याशित, तनावग्रस्त और आक्रामक स्वभाव के होते हैं। इंसानों के आमने-सामने आने पर इनके हमले का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

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