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Jadavpur University Row: जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर ‘ऋषि अरबिंदो’ रखने की मांग, BJP विधायक के बयान पर TMC का पलटवार

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) के नामकरण को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक सरबरी मुखर्जी ने सार्वजनिक मंच से जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर महान स्वतंत्रता सेनानी और दार्शनिक ‘ऋषि अरबिंदो’ के नाम पर रखने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस ऐतिहासिक संस्थान के नाम परिवर्तन के लिए राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को एक विशाल हस्ताक्षर युक्त याचिका (पिटीशन) भेजी जाएगी।

यह पूरा विवाद जादवपुर यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर आयोजित एक राष्ट्रवादी सम्मेलन के दौरान शुरू हुआ, जहां भाजपा नेताओं ने कैंपस के अंदर कथित देश-विरोधी व वामपंथी-माओवादी गतिविधियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई।

📜 ऋषि अरबिंदो की ऐतिहासिक भूमिका की दलील: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बयान को बताया ‘निजी राय’

नाम बदलने के प्रस्ताव पर पार्टी के भीतर का रुख:

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला: सभा को संबोधित करते हुए विधायक सरबरी मुखर्जी ने कहा कि इस संस्थान की मूल अवधारणा ऋषि अरबिंदो ने औपनिवेशिक काल में बंगाली बुद्धिजीवियों को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने के लिए तैयार की थी; इसलिए संस्थान का नाम उनकी ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने वाला होना चाहिए।

  • बयान से प्रदेश नेतृत्व की दूरी: हालांकि, विधायक के बयान के कुछ ही घंटों बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पार्टी स्तर पर इस बयान से किनारा कर लिया।

  • व्यक्तिगत राष्ट्रवादी विचार: समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर यूनिवर्सिटी का नाम बदलने पर कोई फैसला नहीं लिया है और यह सरबरी मुखर्जी का निजी राष्ट्रवादी दृष्टिकोण है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यूनिवर्सिटी की स्थापना की नींव में ऋषि अरबिंदो का अतुलनीय योगदान रहा है और पार्टी उनकी उस भूमिका का पूरा सम्मान करती है।

⚔️ टीएमसी नेता कुणाल घोष का तीखा पलटवार: ‘जादवपुर पहले से उत्कृष्ट, नाम बदलने की कोशिश मानवता विरोधी’

विपक्षी खेमे की प्रतिक्रिया और राजनीतिक तकरार:

  • नाम बदलने को बताया गैर-जरूरी: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने नाम बदलने की इस पहल पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऋषि अरबिंदो के प्रति हर भारतीय के मन में गहरा सम्मान है, परंतु इसके लिए किसी ऐतिहासिक संस्थान का स्थापित नाम बदलना पूरी तरह अनुचित है।

  • संस्थान की स्वायत्तता और पहचान: कुणाल घोष ने इस तरह के प्रयासों को संकीर्ण मानसिकता का परिचायक बताते हुए कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है और इसकी पहचान से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।

  • भाजपा की राजनीति पर हमला: उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नाम बदलने की विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देती है, जो सामाजिक ताने-बाने के अनुकूल नहीं है।

⚠️ कैंपस की राजनीति में बढ़ा तनाव: शिक्षाविदों ने जताई पहचान कमजोर होने की चिंता

संस्थान की वर्तमान स्थिति और व्यापक प्रभाव:

  • पूर्व विवादों की पृष्ठभूमि: नाम बदलने की इस मांग ने यूनिवर्सिटी के इर्द-गिर्द पहले से जारी वैचारिक तनाव को और गहरा कर दिया है, जहां हाल के दिनों में छात्र गुटों के बीच झड़पें, दीवारों पर विवादित नारे और पुलिस-छात्र गतिरोध जैसी घटनाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं।

  • शिक्षाविदों की राय: कई शिक्षाविदों और पूर्व छात्रों ने चिंता व्यक्त की है कि देश के शीर्ष ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में शुमार इस संस्थान का नाम बदलने से इसकी ऐतिहासिक पहचान और वैश्विक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

  • प्रशासनिक स्थिति: वर्तमान में यह विवाद एक राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित है; राज्य सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नाम बदलने को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।

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