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मध्यप्रदेश

Lumpy Virus in MP: ग्वालियर में लंपी का प्रकोप बेकाबू; 25 हजार से अधिक मवेशियों के टीकाकरण के बाद भी मौतों का आंकड़ा बढ़ा

ग्वालियर। लंपी वायरस के चलते लगातार गोवंश की मौतों ने जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। गायों की मौत का आधिकारिक आंकड़ा मंगलवार को बढ़कर 34 तक पहुंच गया है। रतवाई गौशाला, जिसे संक्रमित मवेशियों के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, वहां इलाज के नाकाफी इंतजामों की पोल खुलने के बाद मंगलवार से प्रशासन ने 24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी लगाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

🏛️ कलेक्ट्रेट में आपात बैठक: कलेक्टर रुचिका चौहान ने समीक्षा कर दिए 24 घंटे मॉनिटरिंग के निर्देश

कलेक्टर रुचिका चौहान ने लंपी वायरस के संक्रमण से उत्पन्न स्थिति के संबंध में कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई और व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की।

पशुपालन विभाग द्वारा अब तक जिले में 25 हजार से अधिक गोवंश को ‘गोट पॉक्स’ वैक्सीन लगाने का दावा किया जा रहा है, इसके बावजूद संक्रमण की रफ्तार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। शहर के साथ-साथ भितरवार, डबरा और घाटीगांव जैसे ग्रामीण इलाकों में रोजाना दर्जनों नए संक्रमित मवेशी सामने आ रहे हैं और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को अकेले रतवाई गोशाला में चार संक्रमित गोवंश की मौत दर्ज की गई, जबकि पूरे जिले की वास्तविक स्थिति विभाग के पास भी स्पष्ट नहीं है।

🩺 रतवाई आइसोलेशन सेंटर में 24 घंटे तैनात रहेंगे डॉक्टर: 7 विशेष वाहन और एंबुलेंस संचालित

जिले में गोवंश को लंपी वायरस से बचाने के लिए प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाए हैं।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने समीक्षा बैठक के दौरान नगर निगम, जिला पंचायत और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने रतवाई गोशाला स्थित आइसोलेशन सेंटर में मवेशियों के लिए शेड, पेयजल और पर्याप्त दवाओं के भंडारण के साथ-साथ तीन पारियों (शिफ्टों) में डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती का आदेश दिया।

रात के समय आपात इलाज के लिए एक विशेष मेडिकल टीम तैनात रहेगी। नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने बताया कि संक्रमित गोवंश को सेंटर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए 7 विशेष वाहन और एंबुलेंस संचालित किए जा रहे हैं। जिला पंचायत सीईओ सोजान सिंह रावत ने कहा कि टीकाकरण की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है।

🔬 जांच रिपोर्ट एक औपचारिकता: 14 सैंपल भोपाल भेजे गए, सनातन सेना ने की मदद

बैठक में मौजूद उप संचालक (पशु चिकित्सा) डॉ. डी.के. गुप्ता के मुताबिक, अब तक 14 सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।

उनका कहना है कि रिपोर्ट केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता है, क्योंकि बीमारी के लक्षण स्पष्ट रूप से लंपी वायरस के ही हैं। वहीं रतवाई गौशाला में सनातन सेना की टीम ने मंगलवार को पहुंचकर गायों को ड्रिप लगवाई और दवाओं के वितरण में सहयोग किया।

🦠 वैक्सीन भी साबित हो रही बेअसर: वायरस म्यूटेशन और बारिश बनी बड़ी चुनौती

उप संचालक (पशु चिकित्सा) डॉ. दिलीप गुप्ता के अनुसार, इस बार लंपी वायरस का स्ट्रेन पिछले सालों की तुलना में काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है।

इसके पीछे तीन मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:

  • वायरस म्यूटेशन: अन्य वायरल बीमारियों की तरह इस बार भी लंपी वायरस के स्ट्रेन में बदलाव आ चुका है, जिससे पुरानी एंटीबॉडीज उतनी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं।

  • लक्षणों के बाद वैक्सीन बेअसर: जिन गोवंश में वायरस के शुरुआती लक्षण (जैसे तेज बुखार, शरीर पर गांठें बनना) आ चुके हैं, उन पर वैक्सीन का कोई असर नहीं पड़ता। टीकाकरण केवल पूरी तरह स्वस्थ गोवंश को संक्रमण से बचाने के लिए होता है।

  • एंटीवायरल दवा का अभाव: लंपी की कोई सटीक एंटीवायरल दवा न होने के कारण मवेशियों का इलाज केवल बुखार, दर्द और घाव सुखाने के लक्षणों के आधार पर ही संभव है। इसके अलावा नमी और मक्खी-मच्छरों का मौसम होने के कारण यह वायरस कीटों के जरिए तेजी से फैल रहा है।

📜 ग्वालियर-चंबल में लंपी का इतिहास: 2022 से अब तक की स्थिति

ग्वालियर-चंबल अंचल में लंपी वायरस का पहला बड़ा हमला वर्ष 2022 के मध्य में देखा गया था, जब राजस्थान और गुजरात से सटे सीमावर्ती जिलों के रास्ते यह संक्रमण ग्वालियर अंचल तक पहुंचा था।

साल 2022-23 में तीन हजार से अधिक मवेशी इसकी चपेट में आए थे और सैकड़ों गोवंश की जान चली गई थी। इसके बाद प्रशासन ने पशु मेलों, अंतरराज्यीय पशु परिवहन और खुले बाजारों में मवेशियों की बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे।

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