Indore RTO HSRP Update: बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट चल रहे 75 हजार वाहन, रेड सिग्नल तोड़ा तो भी बचना मुश्किल

इंदौर। इंदौर शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे आधुनिक कैमरों से ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान कर ऑनलाइन चालान जारी किए जा रहे हैं।
हालांकि, शहर में करीब 75 हजार वाहन ऐसे हैं जिन पर अब तक ‘हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट’ (HSRP) नहीं लग सकी है। इन वाहनों की सामान्य नंबर प्लेट कैमरा सिस्टम में ठीक से रीड नहीं हो पाती, जिससे ऑनलाइन चालानी कार्रवाई में बाधा आ रही है। इसका अनुचित लाभ उठाकर कुछ वाहन चालक बेखौफ होकर रेड सिग्नल पार करने जैसे गंभीर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
📜 2019 से पहले की 13 लाख गाड़ियों में लगनी थी प्लेट: आरटीओ का ट्रांसफर और रिन्युअल रोकने का कदम
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के अनुसार, इंदौर जिले में 1 अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत करीब 13 लाख से अधिक वाहनों में HSRP लगाया जाना अनिवार्य किया गया था।
परिवहन विभाग द्वारा वाहन ट्रांसफर, री-रजिस्ट्रेशन और रिन्युअल जैसे कामों के लिए HSRP को अनिवार्य किए जाने से अधिकांश वाहनों में प्लेट लग गई। इसके बावजूद करीब 75 हजार वाहन अब भी बिना HSRP के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। आरटीओ प्रदीप शर्मा का कहना है कि HSRP नंबर प्लेट जांचे बिना दफ्तर में किसी भी वाहन का ट्रांसफर या अन्य आवेदन प्रोसेस नहीं किया जाता, और चेकिंग के दौरान बिना प्लेट वाले वाहनों पर तुरंत चालानी कार्रवाई की जा रही है।
⏳ 5 साल तक क्यों ठप रही HSRP की प्रक्रिया? जानिए मुख्य वजह
वाहनों में HSRP लगाने की प्रक्रिया सबसे पहले वर्ष 2012 में शुरू की गई थी।
कंपनी ‘लिंक उत्सव प्रा. लि.’ को 15 वर्षों का अनुबंध दिया गया था, लेकिन कई शिकायतों के बाद वर्ष 2014 में यह अनुबंध रद्द कर दिया गया। इसके बाद मामला कोर्ट में चले जाने के कारण काम पूरी तरह प्रभावित रहा। 1 अप्रैल 2019 से अधिकृत डीलरों को HSRP लगाने की नई जिम्मेदारी दी गई। इस प्रकार लगभग 5 वर्षों तक वाहनों में हाई सिक्योरिटी प्लेट लगाने का काम पूरी तरह से अटका रहा।
🛡️ वाहनों में HSRP क्यों है बेहद जरूरी? जानिए इसके प्रमुख फायदे
हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) न केवल कानूनी रूप से अनिवार्य है, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है:
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वाहन चोरी पर प्रभावी रोक: इस प्लेट को आसानी से निकालकर किसी दूसरे वाहन पर लगाना असंभव होता है, जिससे वाहन चोरी की घटनाओं पर लगाम लगती है।
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फर्जी नंबर प्लेट पर अंकुश: HSRP में अत्याधुनिक टेम्पर्ड-प्रूफ (छेड़छाड़-रोधी) तकनीक होती है, जिससे फर्जी या नकली नंबर प्लेट बनाना मुमकिन नहीं है।
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कैमरों से त्वरित पहचान: यूनिक नंबर और निर्धारित मानक डिजाइन के कारण सीसीटीवी (CCTV) व ऑटोमैटिक ट्रैफिक कैमरों से वाहन की सटीक पहचान आसानी से हो जाती है।
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ऑनलाइन चालान में सुगमता: नियम तोड़ने वाले वाहनों का स्वचालित ई-चालान (E-Challan) बिना किसी त्रुटि के सीधे वाहन मालिक के पते पर भेजा जा सकता है।
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10 अंकों का यूनिक लेजर कोड: प्लेट पर लेजर से 10 अंकों का यूनिक पहचान नंबर अंकित होता है, जो केंद्रीय ‘वाहन’ पोर्टल के डिजिटल रिकॉर्ड से लिंक रहता है।
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नॉन-रीयूजेबल स्नैप लॉक: यह प्लेट विशेष स्नैप लॉक से कसी जाती है। यदि इसे एक बार निकाला जाए, तो दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।


