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Pediatric Surgery in Kawardha: जन्म से विकसित नहीं थी आहार नली, रायपुर के सर्जन ने बुलाई गई टीम के साथ की सफल सर्जरी

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से चिकित्सा जगत का एक प्रेरणादायक और चमत्कारी मामला सामने आया है। यहां जन्म के समय महज 7वें महीने में दुनिया में आए एक प्री-मैच्योर नवजात की जान बचाने के लिए कवर्धा के निजी मिश्रा अस्पताल के डॉक्टरों ने करीब डेढ़ महीने तक लगातार अथक प्रयास और गहन चिकित्सा निगरानी की। जन्म के वक्त इस बच्चे की आहार नली (फूड पाइप) पूरी तरह से विकसित नहीं थी, जिसके कारण वह जो भी दूध पीता था, वह पेट तक पहुंचने के बजाय वापस बाहर निकल जाता था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रायपुर से विशेष रूप से विशेषज्ञ सर्जन को बुलाया गया और नवजात की बेहद जटिल सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम दिया गया। डॉक्टरों के इस लंबे उपचार और सफल ऑपरेशन के बाद अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और अपनी मां का दूध पीने लगा है।

🩺 जन्म के समय वजन था मात्र 1.4 किलोग्राम, मां द्वारा दूध पिलाने पर बाहर आने पर चला गंभीर बीमारी का पता

कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम धनगांव के रहने वाले आरुण कुमार की पत्नी दुर्गा मानेश्वर ने गर्भावस्था के सातवें महीने में ही इस बच्चे को जन्म दिया था। समय से पहले जन्म होने के कारण नवजात का शारीरिक वजन बेहद कम यानी महज 1.4 किलोग्राम था। जन्म के तुरंत बाद जब मां ने उसे दूध पिलाने की कोशिश की, तो बच्चा दूध पचा नहीं पाया और वह तुरंत वापस लौटने लगा। घबराए हुए परिजन तुरंत नवजात को लेकर शहर के विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसकी विस्तृत जांच शुरू की।

🔬 आहार नली का पेट से नहीं था संपर्क, रायपुर के विशेषज्ञ सर्जन डॉ. शर्मा ने टीम के साथ किया जटिल ऑपरेशन

अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष मिश्रा ने बच्चे की जांच के बाद परिजनों को बताया कि नवजात की आहार नली जन्मजात रूप से विकसित नहीं हो पाई थी और उसका पेट से कोई संपर्क नहीं था, जिस वजह से भोजन या दूध का पेट तक पहुंचना पूरी तरह असंभव था। मामला बेहद जटिल होने के कारण रायपुर से बाल एवं विशेषज्ञ सर्जन डॉ. शर्मा को कवर्धा बुलाया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर नवजात की बेहद संवेदनशील सर्जरी की और आहार नली को उसके पेट के साथ जोड़ा। इसके बाद बच्चे को करीब डेढ़ महीने तक विशेष आईसीयू और मेडिकल निगरानी में रखा गया। कवर्धा जिले के चिकित्सा इतिहास में इस तरह की जटिल समस्या का यह पहला सफल ऑपरेशन माना जा रहा है। डेढ़ महीने की कड़ी देखभाल के बाद स्वस्थ हुए बच्चे ‘सक्षम’ को सकुशल अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

💳 गरीब परिवार के लिए वरदान साबित हुई ‘आयुष्मान योजना’, पिता ने डॉक्टरों और सरकार का जताया आभार

नवजात के पिता आरुण कुमार ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी सक्षम नहीं थी कि वे राजधानी रायपुर के किसी बड़े महंगे निजी अस्पताल में अपने बच्चे का इतना खर्चीला इलाज करवा पाते। ऐसे समय में सरकार की ‘आयुष्मान भारत योजना’ उनके परिवार के लिए एक बड़ा और जीवनरक्षक सहारा बनकर सामने आई। अस्पताल में बच्चे की जटिल सर्जरी से लेकर डेढ़ महीने तक चले लंबे उपचार का पूरा खर्च इसी योजना के अंतर्गत कवर हुआ, जिससे उन्हें अपनी जेब से एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। माता-पिता ने डॉक्टरों की पूरी टीम और शासन-प्रशासन के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।

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