Punjab Bridge News: गुरदासपुर के मकोड़ा पत्तन पर स्थायी पुल का रास्ता साफ, पाकिस्तान सीमा से सटे भरियाल टापू का कटेगा संपर्क संकट

गुरदासपुर जिले के मकोड़ा पत्तन पर रावी दरिया के उस पार बसे सात गांवों के निवासियों के लिए एक अत्यंत राहत भरी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है।
मानसून के मौसम में बाढ़ और जलस्तर बढ़ने के कारण हर साल देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट जाने वाले इन गांवों को अब जल्द ही स्थायी कनेक्टिविटी मिलने जा रही है।
हल्का विधायक अरुणा चौधरी के विशेष प्रयासों से रावी दरिया पर मकोड़ा पत्तन पर जल्द ही एक पक्के और स्थायी पुल का निर्माण कार्य शुरू होने वाला है। इस पुल के बनने से उन हजारों ग्रामीणों को सीधी राहत मिलेगी, जो भारी बरसात के दिनों में रावी नदी में उफान आने के कारण रोजगार, पढ़ाई, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हो जाते थे। उल्लेखनीय है कि मकोड़ा पत्तन पर पक्के पुल के निर्माण की यह मांग देश की आजादी के समय से ही लगातार उठाई जा रही थी।
🛶 पलटून पुल और नाव के भरोसे 3,000 जिंदगियां: बरसात आते ही टूट जाता था संपर्क
दशकों पुरानी अस्थायी व्यवस्था और ग्रामीणों का संघर्ष:
-
अस्थायी पलटून पुल की व्यवस्था: पिछले कई दशकों से लोक निर्माण विभाग (PWD) रावी दरिया पार बसे गांवों के लगभग 3,000 लोगों की दैनिक आवाजाही के लिए साल के कुछ महीनों के लिए अस्थायी पलटून (पीपा) पुल तैयार करता आ रहा है।
-
मानसून में पुल हटाना मजबूरी: जुलाई माह में जैसे ही मानसून की बरसात शुरू होती है, दरिया का जलस्तर बढ़ते ही विभाग सुरक्षा कारणों से इस पीपे वाले पुल को हटा देता है।
-
नाव सेवा भी हो जाती थी ठप: पुल हटाने के बाद प्रशासन द्वारा किश्ती (नाव) सेवा शुरू की जाती है, लेकिन जब पानी का बहाव अत्यंत तेज और जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच जाता है, तो नाव सेवा भी पूरी तरह बंद कर दी जाती है।
-
सालाना संपर्क टूटना: इसके चलते हर साल मकोड़ा पत्तन के सामने दरिया पार स्थित इलाकों के ग्रामीणों को आने-जाने में भारी कठिनाइयों, जोखिम और अलगाव का सामना करना पड़ता था।
🇵🇰 तीन तरफ से पाकिस्तान सीमा से घिरा ‘भरियाल टापू’: दो बार चुनाव बहिष्कार के बाद पूरी हुई मांग
सीमावर्ती भौगोलिक चुनौतियां और स्थानीय संघर्ष:
-
पाकिस्तान से सटा टापू इलाका: यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से तीन तरफ से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से घिरा हुआ है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘भरियाल टापू’ के नाम से जाना जाता है।
-
दोहरी चुनौती का सामना: इस टापू पर बसे ग्रामीणों को एक तरफ सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और सुरक्षा खतरों का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी तरफ मानसून के दौरान शेष भारत से संपर्क कटने की दोहरी मार झेलनी पड़ती है।
-
जन आंदोलन और चुनाव बहिष्कार: अपनी इस बुनियादी और जीवनरक्षक मांग को लेकर क्षेत्र के लोग पिछले कई सालों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। अपनी पीड़ा को सरकार तक पहुंचाने के लिए स्थानीय ग्रामीण दो बार विधानसभा चुनावों का पूर्ण बहिष्कार तक कर चुके हैं।
-
जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य: अब विधायक अरुणा चौधरी के निरंतर प्रयासों और प्रशासनिक स्वीकृतियों के बाद मकोड़ा पत्तन पर स्थायी पुल का निर्माण जल्द शुरू होने जा रहा है, जिससे सीमांत क्षेत्र के लोगों की दशकों पुरानी तपस्या और इंतजार समाप्त होगा।





