ब्रेकिंग
ED Officers SC ST Act Case Ranchi: हाईकोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय, 2 नवंबर को होगी अगल... Jharkhand Food Department Guidelines: अवैध एलपीजी उपयोग रोकने के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों मे... Charged for Impact Event Dhanbad: इंडस्ट्री और एकेडमिक सहयोग पर विशेष चर्चा, कई दिग्गज हुए शामिल 174 यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज कैप्टन: स्मित मछार को 'गुजरात गरिमा पुरस्कार' से नवाजेगी सरका... Ranchi News: नामकुम में स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम, मंत्री योगेंद्र प्रसाद ... चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका: संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर उठे... Dhamtari Snake Bite News: घर में सो रही मां और मासूम बेटी को करैत सांप ने डसा, डेढ़ साल की बच्ची की द... INDIA गठबंधन के साथ हैं, लेकिन राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी पर साधी चुप्पी: मध्यावधि चुनाव के संके... CGPSC and UPSC Success Story: कैंसर को मात देकर अधिकारी बने संजय डहरिया की कहानी से युवाओं को मिली प... Chhattisgrah Politics Update: विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही यात्रा, 7 अक्टूबर को पहुंचेगी...
विदेश

डोनाल्ड ट्रंप को इस साल भी नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की संभावना नहीं: ईरान युद्ध बना बड़ा रोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस वर्ष भी प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की संभावना नहीं दिख रही है। विश्लेषकों के अनुसार, इसका मुख्य कारण अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ा गया सैन्य संघर्ष है, जिसके चलते व्यापक स्तर पर मानवीय संकट पैदा हुआ और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं।

इसके साथ ही, नोबेल समिति के भीतर ऐसे व्यक्तित्व या संगठन को यह सम्मान देने पर विचार चल रहा है, जो ट्रंप की नीतियों का मुखर विरोधी रहा हो। वर्ष 2025 में वेनेजुएला की नेता मारिया कोरीना मचाडो को शांति का नोबेल दिया गया था, जिन्होंने पुरस्कार ग्रहण करने के बाद इसे प्रतीकात्मक रूप से ट्रंप को समर्पित कर दिया था, जिससे नोबेल समिति की निष्पक्षता पर काफी सवाल उठे थे।

⚖️ इंटरनेशनल कोर्ट ट्रिब्यूनल के नाम पर विचार: रॉयटर्स के हवाले से बड़ा खुलासा

नोबेल समिति के संभावित रुख और अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य:

  • रॉयटर्स की रिपोर्ट: समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने उच्चस्तरीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि ट्रंप इस साल भी शांति पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो सकते हैं।

  • ट्रिब्यूनल का विकल्प: नोबेल समिति गंभीरता से विचार कर रही है कि क्या इस बार यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘इंटरनेशनल कोर्ट ट्रिब्यूनल’ को प्रदान किया जा सकता है।

  • अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना: उल्लेखनीय है कि इसी इंटरनेशनल कोर्ट ट्रिब्यूनल पर अमेरिका ने कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं और वाशिंगटन प्रशासन ने कोर्ट के वैश्विक फंड पर भी रोक लगा रखी है। ऐसे में ट्रिब्यूनल को सम्मानित करना एक कड़ा वैश्विक संदेश हो सकता है।

🏆 नोबेल शांति पुरस्कार: रेस में कौन-कौन से प्रमुख नाम शामिल?

9 अक्टूबर को होने वाली औपचारिक घोषणा और शीर्ष दावेदार:

  • 9 अक्टूबर को फैसला: नोबेल शांति पुरस्कार की औपचारिक घोषणा 9 अक्टूबर को निर्धारित है, जिसके लिए ओस्लो में समिति के भीतर गहन मंथन चल रहा है।

  • प्रमुख दावेदार: विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौड़ में डोनाल्ड ट्रंप के अतिरिक्त पोप, इंटरनेशनल कोर्ट ट्रिब्यूनल, फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) की विशेष प्रतिवेदक फ्रांसेस्का अल्बनीज शीर्ष दावेदारों में शुमार हैं।

  • पिछले साल का घटनाक्रम: वर्ष 2025 में कंबोडिया, इजराइल और पाकिस्तान ने ट्रंप के नाम की सिफारिश की थी और अंतिम समय तक उनके नाम पर चर्चा थी, लेकिन अंतिम क्षणों में पुरस्कार मचाडो की झोली में चला गया था।

🎯 विशेषज्ञों का विश्लेषण: ट्रंप के इर्द-गिर्द घूमेगा इस बार का फैसला

शांति अनुसंधान संस्थानों और राजनीतिक विश्लेषकों का मत:

  • दबाव झेलने वाले चेहरे की तलाश: ओस्लो स्थित शांति अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक हाकॉन गेर्लो के अनुसार, समिति इस बार चयन में विशेष सावधानी बरतेगी ताकि जिसे भी चुना जाए, वह पुरस्कार मिलने के बाद आने वाले राजनीतिक दबाव का मजबूती से सामना कर सके।

  • धुर-विरोधी को संदेश देने की मंशा: विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का पुरस्कार ट्रंप के किसी स्पष्ट आलोचक को देकर यह संदेश दिया जा सकता है कि वैश्विक शांति, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्य ही नोबेल की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

  • पोप का नाम भी चर्चा में: स्टॉकहोम इंटरनेशनल के डायरेक्टर करीम हग्गाग का मानना है कि पोप इस दौड़ में काफी आगे चल रहे हैं, क्योंकि वे लगातार युद्ध, आक्रामकता और वैश्विक सैन्य नीतियों के खिलाफ शांति का संदेश दे रहे हैं। कुल मिलाकर नोबेल शांति पुरस्कार का पूरा विमर्श अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी नीतियों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहने वाला है।

Related Articles

Back to top button