विपक्ष की रैली पर आशीष शेलार का तीखा हमला: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को बताया ‘लोमड़ियों का मार्च’

महाराष्ट्र के प्रमुख मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता आशीष शेलार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिवसेना (UBT) और मनसे (MNS) द्वारा आयोजित विरोध रैली पर कड़ा प्रहार किया है।
उन्होंने इस रैली को ‘वर्ल्ड एनिमल डे’ के दिन निकाला गया “लोमड़ियों का मार्च” करार दिया है।
भाजपा नेता ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे और अन्य विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव न जीत पाने के कारण ये दल अब चुनाव आयोग (EC) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर बेवजह सवाल खड़े कर रहे हैं।
🍇 “अंगूर खट्टे हैं वाली कहावत”: ठाकरे बंधुओं और विपक्ष पर साधा निशाना
आशीष शेलार के बयानों और तर्कों के मुख्य बिंदु:
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कोल्हेकुई मोर्चा: पीटीआई न्यूज के अनुसार शेलार ने तंज कसते हुए कहा, “आज वर्ल्ड एनिमल डे है। रैली और उसका नाम देखने के बाद मुझे लगता है कि यह कोई दहाड़ (गर्जना) मोर्चा नहीं, बल्कि ‘कोल्हेकुई मोर्चा’ यानी लोमड़ियों का मार्च है। लोमड़ियां कह रही हैं कि अंगूर खट्टे हैं। चुनाव न जीत पाने के लिए ये लोग ईसी (EC) को दोषी ठहरा रहे हैं।”
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राजनीतिक रिश्तों पर गौर: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर हमला बोलने से पहले ठाकरे बंधुओं को खुद अपने राजनीतिक अतीत और रिश्तों पर गौर करना चाहिए।
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बदलता स्टैंड: शेलार ने कहा कि जब उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियां चुनाव जीतती हैं, तो उन्हें ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया बिल्कुल सही लगती है, लेकिन हार मिलने पर वे संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं।
🗳️ ईवीएम और एसआईआर (SIR) पर क्या बोले शेलार? इतिहास का दिया हवाला
चुनाव प्रक्रिया और आंकड़ों से जुड़े तथ्य:
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ईवीएम की शुरुआत: बैलेट पेपर से वोटिंग की मांग पर पलटवार करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ईवीएम बीजेपी सरकार ने नहीं शुरू की थी। उन्होंने 1970 के दशक के आखिर में इसके विकास, 1982 में केरल में इसकी शुरुआत और 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act) में हुए संशोधनों का जिक्र किया।
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विपक्ष की जीतों का इतिहास: उन्होंने याद दिलाया कि 2007 और 2012 के मुंबई महानगरपालिका चुनावों में उद्धव की पार्टी जीती थी और 2017 में भी ईवीएम के जरिए ही सत्ता में बनी रही थी। इसी तरह 2009 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राज ठाकरे की पार्टी ने 13 सीटें जीती थीं।
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मतदाता सूची का शुद्धिकरण (SIR): शेलार ने राज ठाकरे द्वारा वोटर लिस्ट को लेकर उठाए गए हालिया विरोध पर सवाल उठाया और कहा कि एसआईआर (SIR) का मुख्य उद्देश्य केवल मतदाता सूची को साफ, पारदर्शी और मजबूत बनाना है, ताकि मृत, डुप्लीकेट और बोगस मतदाताओं को सूची से हटाया जा सके।
⚖️ “जीत आपकी तो EVM सही, हारें तो गलत” — छह राज्यों के चुनावों का दिया हिसाब
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बात करते हुए उन्होंने कहा:
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आंकड़ों की सच्चाई: ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभालने के बाद देश के छह राज्यों में चुनाव हुए। इनमें से तीन राज्यों में बीजेपी या एनडीए की सरकारें बनीं, जबकि तीन अन्य राज्यों में गैर-बीजेपी सरकारें सत्ता में आईं।
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निर्णय का आधार: जब स्कोर ‘तीन और तीन’ का है, तो चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाने का कोई आधार ही नहीं बचता।
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कमजोर राजनीतिक ताकतें: अंत में उन्होंने रविवार के इस विरोध प्रदर्शन को “कमजोर और जनता द्वारा नकारी जा चुकी राजनीतिक ताकतों की हताशा” बताया और कहा कि जनता पूरी तरह सतर्क है तथा अपने मताधिकार का सही इस्तेमाल कर रही है।





