महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली पुलिस से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, कहा- अपराधियों के मन में पैदा हो खौफ

दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ लगातार सामने आ रहे रेप और यौन अपराधों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बेहद गंभीर रुख अपनाते हुए अहम सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से तीखे सवाल करते हुए पूछा कि ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए प्रिवेंटिव (अपराध होने से पहले रोकने वाली) पुलिसिंग के तौर पर क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं?
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि सिर्फ कागजों पर आदेश और निर्देश जारी करना काफी नहीं है, बल्कि जमीन पर उनका वास्तविक असर दिखाई देना चाहिए। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है।
🚨 “जब तक अपराधियों के मन में डर नहीं होगा, तब तक ऐसे अपराध नहीं रुकेंगे”
सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने बेहद कड़े शब्दों में कहा:
-
अपराधियों में खौफ: जब तक आप अपराधियों के मन में यह कड़ा डर पैदा नहीं करेंगे कि ऐसा कुकर्म करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, तब तक ऐसे अपराधों पर लगाम नहीं लगाई जा सकती।
-
अधिकारों के नाम पर नरमी नहीं: कोर्ट ने कहा कि कई लोग आर्टिकल 21 (जीवन का अधिकार) और मानवाधिकार समूहों का हवाला देकर अपराधियों के साथ सख्ती का विरोध करेंगे, लेकिन कानून लागू करने वाले अधिकारियों को ऐसे समूहों की परवाह किए बिना रेप जैसे घिनौने अपराध करने वालों के खिलाफ अत्यधिक सख्त रुख अपनाना चाहिए।
-
त्वरित कार्रवाई और चार्जशीट: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि रेप और यौन अपराधों से जुड़े जो भी मुकदमे लंबित हैं, उनका निपटारा तेजी से किया जाए और जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जाए।
🏫 स्कूल-कॉलेज के आसपास सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की निगरानी
-
शिक्षण संस्थानों के पास पहरा: जस्टिस पारदीवाला ने स्कूल और कॉलेजों के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा है, जहां अक्सर शोहदे या असामाजिक तत्व नए छात्रों और छात्राओं को परेशान करते हैं।
-
संवेदनशील इलाकों की पहचान: कोर्ट के पिछले आदेशों के तहत दिल्ली पुलिस को कमजोर और संवेदनशील इलाकों की पहचान करने, सीसीटीवी (CCTV) और स्ट्रीट लाइट की स्थिति की जांच करने तथा पेट्रोलिंग व्यवस्था का ऑडिट करने के निर्देश दिए गए थे।
-
सार्वजनिक आवाजाही: कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि दिल्ली में हर महिला पूरी तरह सुरक्षित महसूस करे, चाहे वह रात के 10 बजे ही क्यों न पैदल चल रही हो या फिर मेट्रो व सड़क मार्ग से यात्रा कर रही हो।
📞 जनता और पुलिस के बीच भरोसे का रिश्ता
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस ऐसी सुलभ संस्था होनी चाहिए जिसके पास आम लोग बिना किसी डर के पहुंच सकें। महिलाओं और बच्चों को किसी भी खतरे या आपात स्थिति की स्थिति में पुलिस से संपर्क करने में किसी भी प्रकार की झिझक या डर नहीं होना चाहिए।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों में सामने आए हालिया गंभीर मामलों (जैसे आसफ कुंज पार्क की घटना, स्वरूप नगर की घटना और ग्रेटर नोएडा बस की घटना) पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह ऐतिहासिक सुनवाई की है और पुलिस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने की बजाय अपराध होने से पहले रोकने के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है।





