Chhatarpur News: खजुराहो के आदिवर्त संग्रहालय में गूंज रहे बुंदेली और बघेली लोकगीत, मां काली के खप्पर नृत्य ने मोहा सैलानियों का मन

देश-विदेश में अपनी ऐतिहासिक धरोहर और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध छतरपुर जिले के खजुराहो में इन दिनों पर्यटकों को यहाँ की स्थानीय कला और संस्कृति का अनूठा रंग देखने को मिल रहा है। खजुराहो आने वाले देशी-विदेशी सैलानियों को बुंदेलखंड और बघेलखंड की समृद्ध जनजातियों के पारंपरिक गीतों और नृत्यों का गहरा चस्का लग गया है। यही वजह है कि हर शनिवार और रविवार को आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है, और बीते रविवार को यहाँ प्रस्तुत किए गए माँ काली के प्रसिद्ध खप्पर नृत्य ने विदेशी सैलानियों को भी पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।
🏛️ हर शनिवार और रविवार को विशेष आयोजन: मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा विलुप्त होती कलाओं को संरक्षण
विश्व प्रसिद्ध नागर शैली के मंदिरों और मूर्तिकला के लिए पहचाने जाने वाले खजुराहो में आने वाले सैलानियों के लिए मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आदिवर्त जनजातीय लोककला राज्य संग्रहालय की स्थापना की गई है। इस संग्रहालय में प्रत्येक शनिवार और रविवार को नृत्य, नाट्य, गायन और वादन पर केंद्रित विशेष सांस्कृतिक श्रृंखला ‘देशज’ का आयोजन किया जाता है। इस मंच के माध्यम से बघेलखंड, बुंदेलखंड और विलुप्त होती जा रही विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक आयोजनों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जहाँ गणेश वंदना, ससुराल गलियाँ और हरे बांस मंडप छाये जैसे पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।
🔥 भक्तिमय हुआ पूरा माहौल: खप्पर नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति और स्थानीय कलाकारों को मिल रही वैश्विक पहचान
बीते रविवार को संग्रहालय में सीधी जिले की टीम की ओर से कुशुमकली कोल के नेतृत्व में ‘काली खप्पर नृत्य’ की बेहद रोमांचक प्रस्तुति दी गई। यह नृत्य बघेलखंड का एक अत्यंत प्रसिद्ध पारंपरिक और धार्मिक लोक नृत्य है, जो मुख्य रूप से नवरात्रि में जवारा विसर्जन के समय किया जाता है। नर्तक द्वारा हाथ में जलते हुए अंगारों से भरे मिट्टी के पात्र (खप्पर) को लेकर ढोल-नगाड़ों की तीव्र गति के बीच किए जाने वाले इस नृत्य ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। सीधी से आईं कलाकार कुशुमकली कोल ने बताया कि इस मंच के माध्यम से उनकी कला को देश-दुनिया तक पहुँचने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है। वहीं, संग्रहालय के अधिकारी अशोक मिश्र ने बताया कि इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराना है।