Saudi Arabia Death Penalty: सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को दी गई फांसी, मक्का की मस्जिद में कथित कृत्य का मामला

विदेश में नौकरी करके अपने परिवार का भविष्य संवारने के सपने के साथ लाखों लोग अपना देश छोड़कर जाते हैं, और बांग्लादेश से भी एक बहुत बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में सऊदी अरब जाते हैं. लेकिन हाल ही में सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी दिए जाने की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने विदेशी कामगारों की सुरक्षा, वहाँ के बेहद सख्त कानूनों और पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का शहर में नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर और सिटी अख्तर नाम के दो बांग्लादेशी नागरिकों को 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा दे दी गई. सऊदी अधिकारियों का दावा है कि दोनों को एक मस्जिद के अंदर कथित तौर पर अनैतिक कृत्य करने के मामले में दोषी ठहराया गया था, हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर मस्जिद के अंदर वास्तव में क्या हुआ था और क्या वे दोनों पति-पत्नी थे, इसकी भी स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हो पाई है. सोशल मीडिया पर यह दावा जरूर किया गया कि दोनों ने मस्जिद में चुंबन किया था, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. सबसे बड़ी बात यह है कि बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि उन्हें इस फांसी से पहले कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी, और अब उन्होंने सऊदी प्रशासन से इस पूरे मामले और न्यायिक प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा मांगा है.
📜 सऊदी में मृत्युदंड के कड़े कानून और एमनेस्टी इंटरनेशनल की चिंता
इस सनसनीखेज घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि क्या किसी विदेशी नागरिक को मौत की सजा देने से पहले उसके देश की सरकार या दूतावास को इसकी सूचना देना जरूरी नहीं है? बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अनुसार, उन्हें और सऊदी अरब में स्थित उनके राजनयिक मिशन को इस फांसी से पहले किसी भी प्रकार की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी. इस मामले को गहराई से समझने के लिए सऊदी अरब में मृत्युदंड के पुराने और हालिया आंकड़ों पर नजर डालना भी बेहद जरूरी है. मानवाधिकार संगठन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने भी सऊदी अरब में मौत की सजा के बढ़ते इस्तेमाल और निष्पक्ष सुनवाई के अभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है. सऊदी अरब में हत्या, आतंकवाद, बलात्कार, सशस्त्र डकैती और सबसे प्रमुख रूप से नशीلي पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के लिए मौत की सजा का कड़ा प्रावधान है. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2014 से जून 2025 के बीच सऊदी अरब में कुल 1,816 लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिनमें से सैकड़ों लोगों को ड्रग्स तस्करी और आतंकवाद के मामलों में सजा मिली थी. साल 2024 में अकेले सऊदी अरब में 330 से 345 लोगों को फांसी दिए जाने के आंकड़े सामने आए थे, जिसमें पाकिस्तान, यमन, सीरिया, नाइजीरिया, मिस्र और बांग्लादेश समेत कई अन्य देशों के विदेशी नागरिक भी शामिल थे.
🌐 अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनयिक अधिकार: क्या विदेशी सरकार को सूचना देना है जरूरी?
इस पूरे मामले में बांग्लादेश की सबसे बड़ी और मुख्य आपत्ति यही है कि उसके राजनयिक अधिकारियों को अपने देश के नागरिकों को दी जाने वाली फांसी की जानकारी पहले से नहीं दी गई. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश मेंजेल में बंद विदेशी नागरिकों के राजनयिक और वाणिज्य दूतावास संबंधी कुछ बुनियादी अधिकार होते हैं. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वे इस बात की जाँच कर रहे हैं कि क्या सऊदी अरब द्वारा समय-समय पर भेजी जाने वाली गिरफ्तार नागरिकों की सूचियों में इन दोनों के नाम शामिल थे या नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक, फांसी की सजा पाने वाला युवा नाजरुल इस्लाम करीब 22. साल का था, जिसने मदरसे की पढ़ाई पूरी करने के बाद साल 2022 में एजेंट के जरिए सऊदी अरब का रुख किया था और रियाद में एक सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था. सऊदी पुलिस ने उसे घटना के करीब 6 महीने बाद हिरासत में ले लिया था, और परिवार के मुताबिक उसने अपनी आखिरी बातचीत में किसी महिला से संबंध होने की बात कही थी, लेकिन फांसी





