इनामी नक्सली नेता रमन्ना की कुर्सी के दावेदारों पर जंगल में मंथन, जानिए क्यों नहीं हो पा रहा चुनाव

जगदलपुर। डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली नेता दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव रावलू श्रीनिवास उर्फ रमन्ना की मौत के छह माह बाद भी नक्सली कमांडर उसकी कुर्सी के दावेदार को तलाश नहीं पाए हैं। सात दिसंबर 2019 को लंबी बीमारी के बाद सुकमा जिले के पालागुड़ा गांव में रमन्ना की मौत हो गई थी। करीब दो दिन बाद इसी इलाके के बेतलंका गांव में हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया था। बाद में नक्सलियों ने आधिकारिक रूप से उसकी मौत की पुष्टि कर दी थी, उसके बाद से रमन्ना के विकल्प की तलाश की जा रही है।
दो दावेदार पद संभालने से हटे
पश्चिम बस्तर डिवीजनल कमेटी के सचिव और नक्सलियों के दक्षिणी संयुक्त कमांड के प्रमुख गणेश उइके उर्फ साका हनुमंतु को रमन्ना की कुर्सी का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि खुफिया विभाग को जो सूचनाएं मिली हैं, उसके मुताबिक गणेश ने बढ़ती उम्र का हवाला देते हुए जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर दिया है। उसके अलावा आंध्र-ओडिशा बॉर्डर कमेटी के सचिव रामकृष्ण ने भी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का पद संभालने से मना किया है। नक्सलियों की घटती संख्या, विचारधारा के प्रति लोगों का दूर होना और पुलिस व सुरक्षा बलों की कार्रवार्इ ने नक्सलियों के भीतर एक डर पैदा कर दिया है। ऐसे में रमन्ना के विकल्प की तलाश और मुश्किल हो गई है।
ग्रामीणों से कर रहे रायशुमारी
नक्सलियों ने क्षेत्र में करीब चार दिन पहले बीजापुर-सुकमा सीमा के जंगल में आसपास के गांवों से आदिवासियों को बुलाया था। इसमें करीब दस हजार ग्रामीण जुटे थे। कहने को तो वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेलकूद कराया गया, पर खुफिया सूत्र बता रहे हैं कि इस मौके पर बड़े नक्सली नेताओं ने अपने आधार इलाके के ग्राम प्रमुखों से रमन्ना की जगह कौन हो, इसे लेकर रायशुमारी की है। पुलिस को भी इस सम्मेलन की सूचना थी।
जल्द हो सकता है नाम घोषित
खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अगले दो-तीन दिन में नक्सली दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव का नाम घोषित कर सकते हैं। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी बस्तर समेत सीमावर्ती आंध्र, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना में माओवादियों की शीर्ष संस्था है। यह कमेटी वामपंथी उग्रवाद के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। नक्सली लगातार कहते रहे हैं कि वे दंडकारण्य को आधार इलाका बनाकर पूरे देश में क्रांति करेंगे। नक्सलियों के सालाना करीब दो हजार करोड़ के बजट में दंडकारण्य के तीन सौ करोड़ रुपये का योगदान होता है। ऐसे में रमन्ना की जगह कौन होगा, इस पर पुलिस की नजर बनी हुई है।
यह हैं दावेदार
गणेश उइके और रामकृष्ण के इन्कार के बाद अब सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के सचिव त्रिपरी तिरूपति उर्फ देवजी, नार्थ सब-जोनल ब्यूरो के राजू उर्फ विजय जारू, ईस्ट बस्तर डिवीजनल कमेटी के सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य के रामचंद्र रेड्डी रमन्ना की कुर्सी के दावेदार हैं। इनके अलावा नक्सलियों की पहली बटालियन का कमांडर मड़कम हिड़मा भी दावेदारी कर रहा है। हिड़मा ने रमन्ना की मौत के बाद 13 दिसंबर को किस्टारम इलाके के साकलेर में अपनी टीम के प्लाटून कमांडरों के साथ बैठक की थी। इसमें सोनू, नागेश, रघु, कमली व कन्हैया मौजूद थे।





