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Bahi Khata 2019: मेक इन इंडिया को ध्यान में रखकर भी पेश होगा बजट, रक्षा पर रहेगा ध्यान

नई दिल्ली । इस बार के बजट में ये उम्मीद भी की जा रही हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज रक्षा बजट पर भी कुछ बड़ा ऐलान कर सकती है। चूंकि वो इससे पहले देश की रक्षा मंत्री रह चुकी हैं इस वजह से उनको देश के रक्षा हालातों के बारे में भी पूरी जानकारी और समझ है, इस वजह से ये माना जा रहा है कि वो रक्षा बजट में भी कुछ अच्छा और खास करेंगी जिससे देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के भी हौसले बुलंद रहें।

ये बजट पेश करने से पहले वो देश की पहली पूर्णकालिक रक्षामंत्री रही चुकी हैं और अहम खरीद समझौतों को अंजाम भी दिया है। इस लिहाज से भी ये माना जा रहा है कि जब वो बजट पेश करेंगी तो देश की सुरक्षा में तैनात लोगों का खास ध्यान रखेंगी। उनके रक्षामंत्री रहते हुए ही भारत ने बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा को अंजाम दिया था।

मोदी सरकार बनने के बाद से देश की डिफेंस का नज़रिया काफी बदला है। अब देश अपनी सीमाओं की रक्षा करने के लिए काफी आक्रामक हो गया है इस वजह से इस दिशा में खर्चें भी काफी बढ़ा दिए गए हैं।

मोदी सरकार में देश की पहली पूर्णकालिक रक्षामंत्री रहते उनके समय में अहम खरीद समझौतों को भी अंजाम दिया गया था।

यदि हम अपने पड़ोसी देशों के रक्षा बजट पर गौर करें तो पाएंगे चीन का रक्षा बजट 250 बिलियन डॉलर का है। यदि जीडीपी से तुलना करें तो इंटरनेश्नल पीस रिसर्च इंस्टीटयूट के मुताबिक हमारे पड़ोसी चीन का रक्षा बजट 250 बिलियन डॉलर का है, ये उसकी जीडीपी का 3 फीसदी है। आतंकवाद की समस्या से जूझ रहे पाकिस्तान का रक्षा बजट 9.6 बिलियन डॉलर का है, ये पाकिस्तान की जीडीपी का 3.5 फीसदी है।

अमेरिका अपने रक्षा और तकनीकी के विकास पर सबसे अधिक खर्च करता है। अमेरिका का रक्षा बजट 694 बिलियन डॉलर का है, ये अमेरिका की जीडीपी का 3.2 फीसदी है। वहीं भारत का रक्षा बजट 46.5 बिलियन डॉलर का है, ये भारत की जीडीपी का 1.54 फीसदी है।

यदि चीन या अमेरिका से तुलना करें तो हमारा रक्षा बजट काफी कम है। दरअसल हमारे देश की चुनौतियां अलग हैं इस वजह से हमारी जरूरतें बजट से कहीं ज्यादा दूसरी चीजों पर हैं, इसलिए ये भी माना जा रहा है कि इस बार का रक्षा बजट अलग हो सकता है।

इस बार भारत के नौसेना में यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर और पनडुब्बियों की जरूरत है। भारतीय वायु सेना नए लड़ाकू विमानों की खरीद का इंतजार कर रही है और भारतीय थल सेना भी ज्यादातर पुराने उपकरण इस्तेमाल कर रही है। उन्हें टैंक और पैदल सेना को लड़ाकू वाहनों की जरूरत है। खास तौर पर मेक इन इंडिया के तहत डिफेंस प्रोडक्शन के लिए बड़ा ऐलान हो सकता है।

भारतीय सेना को नए हथियार, विमान, युद्धक पोत और हार्डवेयर की खरीद के लिए अधिक बजट की ज़रूरत है। एक बात ये भी कही जा रही है कि जिस तरह से हमारी सेना को आधुनिकीकरण की जरूरत है उसके लिहाज से बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है। यदि बजट बढ़ता है तो रक्षा के क्षेत्र में हम और पुख्ता हो पाएंगे।

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