निगम-मंडलों में सिंधी और मसीही समाज को चाहिए प्रतिनिधित्व

रायपुर। बरसों से कांग्रेस पार्टी की सेवा करने वाले सिंधी समाज के समाजसेवियों, कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। प्राय: सभी समाज के कार्यकर्ताओं को किसी न किसी आयोग, मंडल में नियुक्ति दी गई है, लेकिन सिंधी समाज के साथ भेदभाव बरता जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
सिंधी समाज के वरिष्ठ समाजसेवी एवं सिंधु शक्ति के संस्थापक किशोर आहुजा ने मुख्यमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मांग की है कि निगम-मंडलों में सिंधी समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि कार्यकर्ता उत्साह से कांग्रेस पार्टी के कार्यों को आगे बढ़ाएं।
सिंधी समाज के लोगों का कहना है कि समाज के अनेक कार्यकर्ता राज्य निर्माण से पहले के दौर से कांग्रेस पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं। उन कार्यकर्ताओं को उपेक्षित रखा गया है। कांग्रेस पार्टी के लिए जी जान लगाकर कार्य करने वालों में सिंधी समाज के रमेश वर्ल्यानी आनंद कुकरेजा अनेश बजाज सुभाष बजाज, दौलत रोहरा, राजू तारवानी, अमर गिदवानी, लक्ष्मण जगवानी राम गिदवानी, सुरेश धींगानी, अजित कुकरेजा, विक्की वाधवानी, सुनील कुकरेजा शामिल हैं। इन कार्यकर्ताओं में से किसी को जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि समाज उत्साहित होकर पार्टी से जुड़े रहे। सिंधी समाज के लोग शीघ्र ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मिलकर ज्ञापन सौंपने जा रहे हैं।
इधर- आयोग-मंडलों में ईसाई समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए सोनिया गांधी तक पहुंचाई आवाज
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सकार के ढाई साल पूरे होने के बावजूद अनेक निगम मंडलों, आयोग में पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि शीघ्र ही जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसे देखते हुए ईसाई समाज के प्रतिनिधि भी आगे आए हैं। मंडलों में जगह पाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर ईसाई समाज को प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है।
डायसिस आफ छत्तीसगढ़ के पूर्व सचिव एवं सेंट पाल्स चर्च समिति के पूर्व सदस्य नितिन लारेंस ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कहा है कि अल्पसंख्यक की श्रेणी में आने वाले ईसाई समाज को किसी भी मंडल, आयोग में जगह नहीं दी गई। यहां तक कि 100 साल से अधिक समय से मदकूद्वीप में भव्य मेला लगते आ रहा है, उस जगह को ईसाई समाज को सौंपने की भी मांग की गई, लेकिन अब तक मांग पूरी नहीं हुई। समाज को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से समाज की कई समस्याओं पर भी ध्यान नहीं दिया जाता।





