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बड़ी कक्षाओं में अधिक पूछे जाएंगे योग्यता आधारित सवाल

कोरबा। नवीन शिक्षा सत्र में नई कक्षा की पढ़ाई शुरू कर चुके छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण खबर है। अगले वर्ष आयोजित होने वाली परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सवाल नए कलेवर में दिखाई देंगे, जिसके लिए केंद्रीय बोर्ड ने कुछ बदलाव किए हैं।

हाई व हायर सेकेंडरी की बड़ी कक्षा में प्रश्नों की प्रणाली कुछ अलग होगी। परीक्षा के प्रश्नपत्रों में योग्यता आधारित प्रश्न भी पूछे जाएंगे, जिनकी संख्या अधिक होगी। इन सवालों को शामिल करने के साथ पर्चों में छोटे या दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या कम होगी। प्रश्न पत्र में प्रश्नों की संख्या व मूल्यांकन के तरीके में भी बदलाव किया जा रहा है।

नए शिक्षा सत्र के लिए सीबीएसई की ओर से हाई स्कूल व उससे आगे की बड़ी कक्षाओं के लिए परीक्षा के प्रश्नों की प्रणाली में किए गए बदलाव नवमीं से 12वीं तक शामिल होंगे। शिक्षकों का कहना है कि मन लगाकर पढ़ने वाले विद्यार्थी अधिक से अधिक अंक प्राप्त कर सकेंगे, जबकि औसत अंक वाले छात्रों को थोड़ी मेहतन करनी होगी। नई शिक्षा नीति के तहत केंद्रीय बोर्ड ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन कर रही है।

इसमें बताया गया है कि दसवीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में अब लघु व दीर्घ उत्तरीय प्रश्न दस फीसदी कम पूछे जाएंगे। अभी तक दसवीं में लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रशन 70 फीसदी पूछे जाते थे। वहीं 12वीं में 60 फीसदी लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न रहते थे। दसवीं-12वीं बोर्ड में योग्यता आधारित प्रश्न जोड़े गए हैं। बदलाव का असर छात्र-छात्राओं की तैयारियों और स्कूलों की अध्यापन प्रणाली पर भी होगा।

सोचने की क्षमता विकसित करना उद्देश्य

हाई स्कूल में ऐसे प्रश्नों की संख्या 30 व हायर सेकेंडरी कक्षाओं में 20 प्रतिशत होगी। शिक्षकों का कहना है कि मन लगाकर पढ़ने वाले विद्यार्थी अधिक से अधिक अंक प्राप्त कर सकेंगे, जबकि औसत अंक वाले छात्रों को थोड़ी मेहतन करनी होगी।

विद्यार्थियों में सोचने की क्षमता विकसित हो, इसे ध्यान में रखते हुए वार्षिक परीक्षाओं में योग्यता आधारित प्रश्नों को शामिल किया जा रहा है। इसके तहत नवमीं व दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 30 फीसदी, इसी तरह 12वीं में 20 फीसदी क्षमता वाले प्रश्न होंगे। बताया जा रहा कि नई प्रणाली से संबंधित नमूने भी जल्द ही जारी होंगे, जिसे ध्यान में रख स्कूलों में पढ़ाई कराई जाएगी

केस स्टडी और संसाधन आधारित प्रश्न

इसी तरह पर्चों में बहुविकल्प के प्रश्न, केस स्टडी व संसाधन संबंधी प्रश्न भी होंगे। पहले इनकी संख्या 20 प्रतिशत रखी गई थी, जिसमें दस प्रतिशत की वृद्धि कर अब 30 प्रतिशत ऐसे ही सवाल परीक्षा में पूछे जाएंगे। बहुविकल्पीय प्रश्नों की अधिकता परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों का समय बचाएगी और इसका लाभ मन लगाकार पढ़ाई करने वाले मेहनती विद्यार्थियों को अधिक होगा।

इसी तरह केस स्टडी से आधारित प्रश्न उन्हें व्यावहारिक कुशलता के लिए और ज्यादा परिश्रम करने प्रेरित करेंगे। 20 अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न रहेंगे। लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 60 फीसदी से घटा कर अब 50 फीसदी पूछे जाएंगे।

मन लगाकर पढ़ने वाले बच्चों को लाभ

सीबीएसई सहोदय संकुल के सचिव व आइपीएस स्कूल दीपका के प्राचार्य डा संजय गुप्ता का कहना है कि इस तरह के बदलाव होते रहने चाहिए। शिक्षा में सतत प्रयोग नवीनता और गुणवत्ता के विकास के लिए जरूरी है। इस बदलाव से जहां विद्यार्थियों को रोचकता आ एहसास होगा, मेहनत करने वाले बच्चों को परीक्षा में शामिल होने में आनंद भी महसूस होगा। औसत अंक कवर करने वाले बच्चों के लिए भी सालभर की गई पढ़ाई के बाद स्वयं का आंकलन करने में अपेक्षाकृत सरलता का आभास होगा।

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