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बंगाल के पूर्व मंत्री रविरंजन चट्टोपाध्याय का लंबी बीमारी के बाद निधन

कोलकाता। बंगाल के पूर्व मंत्री रविरंजन चट्टोपाध्याय का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को कोलकाता के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने यह जानकारी दी। बर्द्धमान दक्षिण से दो बार विधायक रहे चट्टोपाध्याय मधुमेह और वृद्धावस्था की बीमारियों से पीड़ित थे।वह तृणमूल कांग्रेस सरकार में राज्य के तकनीकी शिक्षा एवं प्रशिक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्येागिकी विभाग के मंत्री रहे थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चट्टोपाध्याय के निधन पर शोक जताया है।

चट्टोपाध्याय, जो एक बंगाली प्रोफेसर थे और उन्होंने बर्दवान विश्वविद्यालय के लिए लंबे समय तक काम किया था। बाद में वह टीएमसी में शामिल हो गए।

मालूम हो कि उन्हें हाल ही में कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 25 दिनों से कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। वह विभिन्न बिमारियों से पीड़ित थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका था। ममता बनर्जी ने अपने शोक संदेश में कहा कि मैं पूर्व तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण मंत्री और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री रविरंजन चट्टोपाध्याय के निधन से बहुत दुखी हूं। उनके निधन से राजनीतिक जगत में एक शून्य पैदा हो गया। मैं रविरंजन चट्टोपाध्याय के परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। अपने राजनीतिक जीवन के अलावा, रविरंजन चट्टोपाध्याय एक प्रोफेसर थे। साल 2011 में पहली बार राजनीति में शामिल हुए थे। तृणमूल के पहले कार्यकाल में वे तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण मंत्री थे।

साल 2011 में, ममता बनर्जी ने वर्द्धमान विश्वविद्यालय में पूर्व प्रोफेसर रवि रंजन चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया था। प्रसिद्ध साहित्यकार महाश्वेता देवी ने उनके लिए सिफारिश थी। वर्द्धमान दक्षिण से जीतकर वे मंत्री बने।उन्हें वर्द्धमान विकास बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था।

वर्द्धमान सीट से उनके प्रतिद्वंद्वी सीपीएम के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री निरुपम सेन थे। रविरंजन चट्टोपाध्याय ने उन्हें 30,000 से अधिक मतों से हराया था और ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में उन्हें जगह मिली थी।

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