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गुजरात

प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश बाद वन सेवा अधिकारी कमलजीत सिंह रंधावा को किया सस्‍पेंड

अहमदाबाद । भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी कमलजीत सिंह रंधावा को प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद सस्पेंड कर दिया गया है। उन पर कृषि नीति के तहत कंपनियों को मनमाने तरीके से 477 करोड़ रुपए दिलाने का आरोप है। गुजरात सरकार को करीब 540 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले कमलजीत सिंह लंबे समय तक राज्य सरकार के कृषि विभाग से जुड़े रहे हैं।

सर्वग्राही तहसील व्यवसाय नीति 2016- 21 के तहत किसानों, कृषि उत्पादकों के नाम पर आईएफएस रंधावा ने गुजरात व देश की करीब 337 कंपनियों को 477 करोड़ रुपये अनियमित तरीके से आवंटित किए जिसके चलते उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई थी लेकिन उन्हें पद से हटाने के बजाय उत्तर गुजरात बिजली कॉरपोरेशन लिमिटेड का प्रबंध निदेशक बना दिया गया था।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनके खिलाफ हुई शिकायतों के मद्देनजर राज्य सरकार से उन से जुड़े सभी दस्तावेज मंगाए तथा उसके अवलोकन के बाद कमलजीत सिंह रंधावा के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद गुजरात सरकार ने रातों-रात रंधावा को पद से हटाने के साथ गांधीनगर नहीं छोड़ने की भी बात कही है। उप सचिव ने अपने आदेश में नर्मदा को टर्न इंडस्ट्री डीवी एग्री लेट्स एंजॉय मशरूम प्राइवेट लिमिटेड उमिया एग्रो कॉरपोरेशन चार कंपनियों को आईएफएस रंधावा ने नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये की सहायता पहुंचायी।

इससे पहले सरकार ने अपनी प्राथमिक जांच के बाद अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अभय जैन असिस्टेंट मैनेजर शैलेश परमार को सस्पेंड कर दिया था लेकिन आईएफएस रंधावा के खिलाफ राज्य सरकार कार्रवाई करने से बच रही थी। सरकार ने कहा है कि रंधावा को प्रबंधन के चलते गुजरात सरकार पर 540 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। रंधावा के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों की भी समीक्षा होगी।

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