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रूस के हमले के बाद यूक्रेन में बेहद खराब हो गए हैं हालात 

कीव। रूस के हमले के बाद यूक्रेन में हालात बेहद खराब हो गए हैं। लोगों के पास न रहने के लिए घर बचा है और न ही खाना-पानी, ऊपर से मौत हर वक्त आसमान में मंडरा रही है। कुछ अपराधिक गिरोह इस मौके का फायदा उठा रहे है। युद्ध शुरू हुए 11 दिन हो चुके हैं और अनुमान है कि अब तक 15 लाख लोग देश छोड़कर जा चुके हैं। शरण के लिए मजबूर लोगों की इस भीड़ का इस्तेमाल ये गिरोह अपने फायदे के लिए कर रहे हैं और महिलाओं को वेश्यावृत्ति और गुलामी के लिए मजबूर कर रहे हैं। यूरोपीय संघ के अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र को डर सता रहा है कि लगभग 70 लाख लोग यूक्रेन से पड़ोसी देशों, पोलैंड, माल्डोवा, रोमानिया, स्लोवाकिया और हंगरी में शरण ले सकते हैं, जिससे मानव तस्करी में भयानक रूप से बढ़ोत्तरी हो सकती है। खबर के मुताबिक लोगों के देश छोड़ने से इस बात का भी खतरा पैदा हो गया है कि ज्यादातर महिलाएं वेश्यावृत्ति, अपराधिक गतिविधियों और जबरन गुलामी में फंस सकती हैं। ऐसी भी खबरें आ रही हैं कि कुछ महिलाओं और परिवारों ने ‘मुफ्त’ में सीमापार करने के ऑफर को स्वीकार कर लिया लेकिन जब वे पड़ोसी देश पहुंचे तो उनसे पैसों की मांग की गई।
खबर के अनुसार एक 27 साल की यूक्रेनी महिला ने कहा, ‘मेरी एक दोस्त पोलैंड गई है, उसने मुझे बताया कि वह जिस शख्स के साथ गई है उसने उसे मुफ्त में वरसॉ पहुंचाने का वादा किया था, लेकिन जब वे वहां पहुंचे तो उसने पैसों की मांग की।’ महिला ने कहा, ‘वह मेरी दोस्त पर भड़क गया और कहने लगा कि वह उसकी कर्जदार है, जिसका भुगतान उसे उसके लिए काम करके करना होगा। मेरी दोस्त ने चिल्लाना शुरू कर दिया और वहां से भाग गई। हम सभी लोगों को ऐसे हालात के लिए सावधान करते हैं।’ चैरिटी केयर के लिए मानव तस्करी नीति विशेषज्ञ लॉरेन एग्न्यू ने बताया कि यूक्रेन का युद्ध मानव तस्करी के नजरिए से एक गंभीर स्थिति पैदा कर देगा। इसका असर पूरे यूरोप पर पड़ेगा। शरणार्थियों के शोषण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह तय है कि समय के साथ हमें तस्करों की ओर से शरणार्थियों के शोषण के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी। युद्ध के चलते सिर्फ जनहानि ही नहीं होगी बल्कि यूक्रेन से संभवतः 70 लाख लोगों के बड़े पैमाने पर विस्थापन से कुछ लोग तस्करी का शिकार बनेंगे। लॉरेन ने कहा कि जिन देशों में शरणार्थी जा रहे हैं, वे अपराधिक गिरोहों के केंद्र हैं और अपराधी उन्हें एक ‘अमीर स्रोत’ के रूप में देख रहे हैं, जिनका फायदा वे आसानी से उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गिरोह इस युद्ध को अपने अपराधिक धंधों के लिए सबसे मुफीद समय के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन दुख इस बात का है कि उनका शिकार महिलाएं और बच्चे बन रहे हैं क्योंकि पुरुषों को यूक्रेन छोड़ने से मना किया गया है और सेना में भर्ती होने के लिए कहा गया है।

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