ब्रेकिंग
रामगंगा नहर किनारे टहलते समय आया मिर्गी का दौरा: नहर में डूबे 25 वर्षीय आशुतोष का 12 घंटे बाद मिला श... Haryana Blood Donation Record: लगातार तीसरे साल रक्तदान में देश में नंबर-1 बना हरियाणा, 1 अक्टूबर को... Kaithal Crime News: कलायत में अवैध पटाखा फैक्ट्री पर CIA का छापा, पटाखों से भरा ट्रक-पिकअप पकड़ा; 4 ... Kurukshetra Murder Case: शराब और मारपीट से तंग आकर पत्नी ने 3 चाकुओं से गोदा पति का पेट, छत से कूदकर... Nuh News: नूंह में मिलावटी पनीर माफिया पर प्रशासन का बड़ा प्रहार, 4 डेरियों से 7,500 किलो नकली पनीर ... Faridabad Fire News: फरीदाबाद में दो जगहों पर भीषण आग, डबुआ-पाली रोड की रबर फैक्ट्री में जलीं 2 गाड़... Atal Pension Yojana: अटल पेंशन योजना में हर महीने मिलेगी ₹5000 तक पेंशन, जानें ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन... Korba Crime News: कोतवाली थाने में 'आज जेल होई, कल बेल होई' गाने पर महिला ने बनाई रील, पुलिस ने की प... Chhattisgarh Monsoon Update: छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बस्तर और रायपुर-दुर्ग संभाग में भा... CGPSC 2003 Scam: छत्तीसगढ़ पीएससी 2003 भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 15 अधिकारियों पर चा...
देश

जमीन की रजिस्ट्री कराने में ना करें देर, अप्रैल से बढ़ सकता है मिनिमम वैल्यू रेट

आपको जमीन की रजिस्ट्री करानी है तो देरी न करें। जितनी जल्दी हो सके जमीन का निबंधन करा लें। जमीन का एमवीआर यानी मिनिमम वैल्यू रेट जल्द बढ़ सकता है। ऐसे में जमीन रजिस्ट्री के लिए ज्यादा पैसा चुकाना होगा। राज्य सरकार अप्रैल में एमवीआर बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए जिलों की राय ली जा रही है। राज्य सरकार का निबंधन विभाग इसके लिए होमवर्क में जुटा है। राज्य सरकार से हरी झंडी मिलते ही जिलों के स्तर पर एमवीआर बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उसके बाद बढ़ी हुई दरों के आधार पर लोगों को निबंधन शुल्क देना होगा। पिछली बार वर्ष 2016 में यानी छह साल पहले एमवीआर बढ़ा था। अलग-अलग जिलों में इसकी दर 10 से 40 फीसदी तक बढ़ाई गई थी।

एमवीआर यानी मिनिमम वैल्यू रेट वह दर होती है जिसे सरकार किसी जमीन का न्यूनतम मूल्य मानती है। किसी खास इलाके में खास तरीके की जमीन की हो रही खरीद-बिक्री में जो औसत बाजार मूल्य पाया जाता है, उसी के आस-पास एमवीआर तय किया जाता है। संबंधित जिलों के जिलाधिकारी इसे अधिसूचित करते हैं। अधिसूचित होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री में उस खास तरह की जमीन का सरकार वही मूल्य मानकर चलती है। जमीन विक्रेता या खरीदार को उसी आधार पर निबंधन शुल्क तय करना होता है। अगर कोई जमीन एमवीआर से कम कीमत में भी खरीदता है तो उसे निबंधन शुल्क एमवीआर के तहत ही देना होता है। अगर किसी सरकारी परियोजना के लिए किसी रैयत की जमीन अधिग्रहित की जाती है तो उस रैयत को मुआवजा के रूप में जमीन की कीमत एमवीआर के तहत ही दी जाएगी।

Related Articles

Back to top button