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प्रशासन ने फिर दिखाया राहुल गांधी को रेड सिग्नल, कहा- कश्मीर आने की जरूरत नहीं

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर सरकार ने शुक्रवार रात बयान जारी कर राजनेताओं से घाटी की यात्र नहीं करने को कहा, क्योंकि इससे धीरे-धीरे शांति और आम जनजीवन बहाल करने में बाधा पहुंचेगी।बयान में यह भी कहा गया है कि सियासतदानों की यात्र पाबंदियों का उल्लंघन करेंगी जो घाटी के कई इलाकों में लगाई गई हैं।यह बयान, कश्मीरी लोगों से मिलने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के सदस्यों की शनिवार को प्रस्तावित यात्र की पृष्ठभूमि में आया है। जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने के बाद से कश्मीर में पाबंदियां लगी हुई हैं।जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बयान में कहा कि ऐसे वक्त में जब सरकार राज्य के लोगों को सीमा पार आतंकवाद के खतरे और आतंकवादियों तथा अलगाववादियों के हमलों से बचाने की कोशिश कर रही है और उपद्रवियों तथा शरारती तत्वों को नियंत्रित करके लोक व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रही है, तब वरिष्ठ राजनेताओं की ओर से आम जनजीवन को धीरे-धीरे पटरी पर लाने में बाधा डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
बयान में कहा गया है कि राजनेताओं से अनुरोध किया जाता है कि सहयोग दें और श्रीनगर की यात्र नहीं करें, क्योंकि उनके ऐसा करने से अन्य लोगों को असुविधा होगी। वे पाबंदियों का भी उल्लंघन करेंगे जो अब भी कई इलाकों में कायम हैं। वरिष्ठ नेताओं को समझना चाहिए कि शांति, व्यवस्था और जानहानि को रोकने को शीर्ष प्राथमिकता देनी चाहिए।अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने के बाद से सरकार ने अबतक किसी भी सियासतदान को राज्य में आने की इजाजत नहीं दी है।
पूर्व मुख्यमंत्रियों, फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती समेत क्षेत्रीय पार्टयिों के नेताओं को नज़रबंद किया हुआ है, जबकि कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आज़ाद को दो बार राज्य में प्रवेश करने से रोका गया है। उन्हें एक बार श्रीनगर में और दूसरी बार जम्मू में रोका गया।

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