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जम्मू में है एक ऐसा गांव, जहां सुन या बोल नहीं पाती है आधी आबादी, जानिए वजह

Dhadkai Village: डडकाई गांव में मूक-बधिर बच्चा पैदा होने का पहला मामला साल 1901 में सामने आया था. 1990 में यहां 46 मूक-बधिर थे. इस बीमारी से परेशान होकर कुछ परिवार पलायन कर दूसरे जगहों पर चले गए हैं.

Dhadkai Village: आए दिन आप देश के कई गांवों की कहानियां पढ़ते या देखते होंगे, जहां अलग-अलग तरह की समस्या या बीमारी मौजूद है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएगा. यह गांव जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के जम्मू में है और इसका नाम डडकाई है. यह गांव डोडा (Doda) के गंदोह तहसील के भलेसा ब्लॉक में पड़ता है. इस गांव की आधी आबादी मूक-बधिर है. ऐसे में यहां के आधे बच्चे न तो बोल पाते हैं और न ही वो सुन पाते हैं.

यही नहीं इस गांव के हर परिवार में आधे लोग इस समस्या का सामना कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि यह किसी जीन सिंड्रोम की वजह से होता है और लेकिन गांव के कुछ लोग इसे अभिशाप भी मानते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस गांव में कुल 78 लोग हैं, जो ना तो बोल सकते हैं और ना ही सुन सकते हैं. जबकि यहां करीब 105 परिवार रहते हैं. इसमें आधे लोग मूक-बधिर हैं यानी उन्हें सुनने या बोलने में दिक्कत होती है. जिसकी वजह से इस गांव को खामोश गांव के नाम से जाना जाता है.

1990 में 46 मूक-बधिर थे डडकाई गांव में

बताया जाता है कि डडकाई गांव में मूक-बधिर बच्चा पैदा होने का पहला मामला साल 1901 में सामने आया था. 1990 में यहां 46 मूक-बधिर थे और इस बीमारी से परेशान होकर कुछ परिवार पलायन कर पंजाब और अन्य जगहों पर चले गए हैं. इसकी वजह से इस गांव में लोग शादियां नहीं करना चाहते हैं. क्योंकि वंशानुगत बीमारी होने के चलते लोग इस गांव में शादी से कतराते हैं. यहां के लोग इंटर मैरिज भी ज्यादा करते हैं, जिससे ये समस्या अभी भी बनी हुई है. वैज्ञानिक इसकी वजह एक अनुवांशिक विकृति को जिम्मेदार मानते हैं. उनका कहाना है कि अलग-अलग समुदायों के बीच शादियां होने से ये विकृति ज्यादा फैली है. ऐसे में गांव के बहुत से लोग अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं.

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