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अमित शाह ने फिर छेड़ी सीएए की बात

नई दिल्ली । भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि कोविड का असर कम हो जाने के बाद नागरिकता संशोधन अधिनियम को लागू किया जाएगा। सीएए-एनआरसी को लेकर देश में पहले भी खासा विवाद हो चुका है।भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (सीएए) एक सच्चाई है और कोविड का असर कम हो जाने के बाद इसे लागू किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में गुरुवार को एक जनसभा में उन्होंने यह बात कही, जिसके बाद सीएए का विवाद फिर से खड़ा होने की आशंका है। क्या बोले अमित शाह? सिलिगुड़ी में एक रैली में अमित शाह ने कहा, “ममता दीदी, आप तो यही चाहती हो कि घुसपैठ चलती रहे, मगर कान खोलकर तृणमूल वाले सुन लें, सीएए वास्तविकता था, वास्तविकता है और वास्तविकता रहने वाला है। इसलिए आप कुछ नहीं बदल सकते हो” अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर कानून के बारे में अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आज मैं उत्तर बंगाल में आया हूं। मैं आपको स्पष्टता करके जाता हूं, तृणमूल कांग्रेस सीएए के बारे में अफवाहें फैला रही है कि सीएए जमीन पर लागू नहीं होगा। मैं आज कहकर जाता हूं, कोरोना की लहर समाप्त होते ही सीएए को हम जमीन पर उतारेंगे” सीएए विरोधी प्रदर्शन: यूपी में वसूले गए जुर्माने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब लौटाए जा रहे हैं अमित शाह के इस बयान को ममता बनर्जी ने “गंदी बात” करार दिया। सीएए के संदर्भ में उन्होंने कहा, “यह उनकी योजना है। वे बिल को संसद में पेश क्यों नहीं कर रहे हैं? मैं आपको बता रही हूं कि हम किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि हम सब साथ रहें। एकता ही हमारी ताकत है। यही स्वामी विवेकानंद ने कहा था। एक साल बाद वह आए थे। हमने चुनाव में उनके साथ जो किया था, उसके बाद वह अपना मुंह छिपाए बैठे थे। हर साल आते हैं, गंदी बात करते हैं।” सीएए पर विवाद नागरिकता संशोधन कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाया गया है। लेकिन इस कानून से मुसलमानों को बाहर रखा गया है। पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 साल देश में रहना अनिवार्य था जिसे घटाकर 6 साल किया गया है। वे बिल को संसद में पेश क्यों नहीं कर रहे हैं? मैं आपको बता रही हूं कि हम किसी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि हम सब साथ रहें। एकता ही हमारी ताकत है। यही स्वामी विवेकानंद ने कहा था। एक साल बाद वह आए थे। हमने चुनाव में उनके साथ जो किया था, उसके बाद वह अपना मुंह छिपाए बैठे थे। हर साल आते हैं, गंदी बात करते हैं।” सीएए पर विवाद नागरिकता संशोधन कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाया गया है। लेकिन इस कानून से मुसलमानों को बाहर रखा गया है। पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम 11 साल देश में रहना अनिवार्य था जिसे घटाकर 6 साल किया गया है।

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