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विदेश

दूर स्थित किसी अन्य ग्रह पर भी मौजूद हो सकते हैं इंसान

टोक्यो।  पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई? वैज्ञानिकों का नया दावा चौंकाने वाला है। कहा जा रहा है कि पृथ्वी पर जीवन एक ऐसे ग्रह से आया है जो हमसे खरबों किमी दूर स्थित है। तो क्या इसका मतलब है कि हम सब एलियंस हैं? इंसानों के डीएनए में पाए जाने वाले केमिकल ब्लॉक्स पहली बार ऐसे ऐस्टरॉइड्स में मिले हैं जो अरबों साल पहले धरती से टकराए थे।
यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि धरती पर जीवन के बीज कहीं और से बोए गए थे और बेहद दूर स्थित किसी अन्य ग्रह पर भी इंसान मौजूद हो सकते हैं। खबर के अनुसार तीन कार्बन युक्त उल्कापिंडों, मुर्चिसन, मुर्रे और टैगिश लेक, की हाई-टेक तरीकों से जांच की गई। जापान की होक्काइडो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यासुहिरो ओबा ने कहा कि हमें न्यूक्लियोबेस सहित कई विविध जैविक सामग्री मिली हैं जो हमारे जीवन के बुनियादी ब्लॉक्स हैं। उन्होंने कहा कि ये चार अरब साल पहले क्षुद्रग्रहों, उल्कापिंडों, धूमकेतुओं और ग्रहों की धूल के कणों से धरती पर लाए गए होंगे, जब हमारे ग्रह पर अंतरिक्ष के मलबे की बमबारी हो रही थी।
ओबा ने कहा कि हमारा मानना है कि इन सामग्रियों ने पृथ्वी पर जीवन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह बहुत ही रोमांचक खोज है जो हमारी समझ का विस्तार करती है कि जीवन कैसे शुरू हुआ। पृथ्वी पर जीवन का आधार, डीएनए और आरएनए बनाने के लिए दो तरह के न्यूक्लियोबेस की आवश्यकता होती है। इन्हें पाइरीमिडीन और प्यूरीन कहा जाता है। इससे पहले उल्कापिंडों में सिर्फ प्यूरीन पाया गया था। कुछ दिनों पहले एक वैज्ञानिक ने दावा किया था कि संभवतः एलियंस का एक ‘विमान’ प्रशांत महासागर में क्रैश हुआ है। अपने दावे को साबित करने के लिए वह एक मिशन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।

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