ब्रेकिंग
MP High Court: बीजेपी विधायक संजय पाठक को बड़ी राहत, आपराधिक अवमानना मामले में बिना शर्त माफी स्वीकार IMD Weather Update: देश के कई राज्यों में भारी बारिश का रेड अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम... Bhopal Robbery Case: कुत्तों को मांस खिलाकर 18 लाख की डकैती डालने वाला शातिर शाहरुख जयपुर से गिरफ्ता... SL Squad for India Test: खेल मंत्री लगाएंगे अंतिम मुहर, श्रीलंका टीम चयन से पहले बोर्ड की बढ़ी मुश्कि... Bollywood on NEET Protest: सलमान खान के बाद अब आलिया भट्ट ने किया छात्रों का सपोर्ट, बॉलीवुड से मिल ... US Iran Conflict: अमेरिका के लगातार हमलों से दहला ईरान, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ट्रंप ने दी बड़ी चेता... BCCI Title Rights: बीसीसीआई ने घरेलू मैचों के स्पॉन्सरशिप राइट्स का बेस प्राइस 15% से ज्यादा बढ़ाया Recharge Plan Expiry: क्या रिचार्ज खत्म होते ही बंद हो सकती है इनकमिंग कॉल? संसद में उठा बड़ा सवाल, ... Krishna’s Peacock Feather: भगवान श्रीकृष्ण क्यों लगाते हैं मुकुट में मोर पंख? जानिए त्रेता युग से जु... Periods Health Tips: क्या पीरियड्स के दौरान ठंडा पानी पीने से बढ़ता है दर्द? जानिए एक्सपर्ट की राय
व्यापार

बैंक चाहते हैं कि RBI बदले धोखाधड़ी की परिभाषा, आखिर बैंको को क्‍यों करनी पड़ रही है यह मांग?

मौजूदा नियमों के मुताबिक यदि कोई किसी एक बैंक में किसी कंपनी का अकाउंट फ्रॉड घोषित हो जाता है तो उसके कंपनी के अन्‍य बैंकों के लोन अकाउंट भी फ्रॉड घोषित हो जाएंगे. बैंक चाहते हैं कि इस नियम में बदलाव करके इसे तर्कसंगत बनाया जाए.

नई दिल्‍ली. देश के सभी प्रमुख बैंक चाहते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक फ्रॉड अकाउंट की परिभाषा को बदले. रिजर्व बैंक के वर्तमान नियमों के अनुसार अगर किसी कंपनी के अकाउंट को कोई एक बैंक फ्रॉड अकाउंट घोषित कर देता है तो सभी बैंकों को उस कंपनी के खातों को फ्रॉड अकाउंट घोषित करना पड़ता है. भले ही कंपनी का लेन-देन दूसरे बैंकों के साथ बिल्‍कुल सही हो.

news18.com  की एक रिपोर्ट के अनुसार इंडियन बैंक एसोसिएशन के (Indian Banks Association) सीईओ सुनील मेहता का कहना है कि हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां फंड के एक छोटे से डायवर्जन के कारण पूरी कंपनी कलंकित न हो और कंपनी द्वारा लिए गए सारे ऋण को ही धोखाधड़ी कर लिया गया लोन न माना जाए.

नियमों में बदलाव की मांगमेहता का कहना है कि फ्रॉड घोषित होने और इसके बाद एफआईआर जैसी कार्यवाही होने से कंपनी की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं. इससे कंपनी के प्रति नकारात्‍मक धारणा बनती है. ये बैंकों को किसी भी तरह के लोन संबंधी निर्णय लेने से रोकती है. मेहता का कहना है कि बैंक इन नियमों में बदलाव की मांग भारतीय रिजर्व बैंक से जल्‍द करेंगे.

मौजूदा नियमों के मुताबिक यदि कोई किसी एक बैंक में किसी कंपनी का अकाउंट फ्रॉड घोषित हो जाता है तो उसके कंपनी के अन्‍य बैंकों के लोन अकाउंट भी फ्रॉड घोषित हो जाएंगे. उदाहरण के लिए अगर किसी फॉरेंसिक ऑडिट में कंपनी द्वारा 500 रुपये कि धोखाधड़ी सामने आती है तो उसी कंपनी द्वारा दूसरे बैंक से लिया गया 10,000 करोड़ रुपये का लोन भी फ्रॉड लोन की श्रेणी में आ जाता है. सभी बैंकों को अपने यहां मौजूद कंपनी के अकाउंट को फ्रॉड घोषित कर आपराधिक कार्यवाही शुरू करनी होती है और कार्यवाही को अपने खातों में दर्ज करना होता है.

धोखाधड़ी में कमीऐसे मामले में, बैंक चाहते हैं कि आरबीआई उन्हें धोखाधड़ी के वर्गीकरण को केवल 300 करोड़ रुपये या वैल्‍यू एट रिस्‍क तक सीमित रखने की अनुमति दे. आज, जिन बैंकों को कंपनी ने डिफॉल्ट नहीं किया है, उन्हें भी कंपनी को धोखाधड़ी की श्रेणी में रखना पड़ता है. इसे बैंक सही नहीं मान रहे हैं.

पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों में धोखाधड़ी में शामिल पूंजी में कमी आई है और यह वित्‍त वर्ष 2022 में 40,295.25 रुपये रही है. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि फ्रॉड के मामलों में ज्‍यादा कमी नहीं आई है. वित्‍त वर्ष 2021-22 में फ्रॉड के 7940 केस सामने आए हैं जबकि पिछले वित्‍त वर्ष में यह संख्‍या 9933 थी.

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 627 धोखाधड़ी के मामलेबैंक ऑफ इंडिया में 209 फ्रॉड केस हुए हैं. इसमें 5923.99 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है. बैंक ऑफ बड़ौदा में 280 फ्रॉड केस सामने आए है तो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 627 धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए हैं. केनरा बैंक में 90 ऐसे केस सामने आए हैं.

2015-16 में बैंकों ने धोखाधड़ी के कारण 67,760 करोड़ रुपये की पूंजी गवाई थी जो 2016-17 में घटकर 59,966.4 करोड़ रुपये रह गई. 2017-18 को धोखाधड़ी के कारण 45,000 करोड़ की चपत लगी. 2019-20 में फिर इसमें गिरावट आई और यह आंकड़ा 27,698.4 करोड़ रुपये पर आ गया. वर्ष 2020-21 में बैंकों ने धोखाधड़ी के कारण 10,699.9 करोड़ रुपये खो दिए.

Related Articles

Back to top button