अयोध्या विवाद: दोनों पक्षों ने बातचीत के जरिये मामला सुलझाने की फिर जताई इच्छा, मध्यस्थता पैनल को लिखा खत

नई दिल्ली. अयोध्या भूमि विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चल रही सुनवाई के बीच हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों (Hindu-Muslim Parties) ने आपसी बातचीत के जरिये भी मामले को सुलझाने की कोशिशें जारी रखने की इच्छा जताई है. शीर्ष अदालत में मामले पर 23 दिन की सुनवाई पूरी होने के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) और निर्वाणी अखाड़ा (Nirvani Akhara) ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए मध्यस्थता समिति (Mediation Panel) को पत्र लिखकर फिर बातचीत शुरू करने की मंशा जाहिर की है. इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू और श्रीश्री रविशंकर का नाम शामिल था.
निर्मोही अखाड़ा भी बातचीत से रास्ता निकालने पर सहमत
सुन्नी वक्फ बोर्ड जमीन के मालिकाना हक की लगातार मांग करता रहा है. अब उसने समिति को मध्यस्थता के लिए पत्र लिखा है. बोर्ड चाहता है कि बातचीत से मुद्दे को सुलझाने की कोशिश फिर शुरू की जाए. निर्वाणी अखाड़ा हनुमान गढ़ी मंदिर की देखरेख करने वाले तीन प्रमुख रामआनंदी अखाड़ों में एक है. निर्वाणी अखाड़े की बातचीत से विवाद सुलझाने की बात से निर्मोही अखाड़ा (Nirmiohi Akhara) भी सहमत है. बता दें कि पहले बातचीत के जरिये मामले को सुलझाने की कवायद उस समय अटक गई, जब जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JUH) ने कट्टरपंथी रवैया अपनाया और राम जन्मभूमि न्यास (Ram Janam Bhoomi Nyasa) विवादित स्थल पर मंदिर बनाने की मांग को लेकर अड़ गया.
पैनल ने 155 दिन बातचीत से हल निकालने की कोशिश की
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद का बातचीत के जरिये समाधान निकालने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था. इसके बाद 155 दिन तक समाधान खोजने की कोशिश भी हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकला. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामले की रोजाना (सप्ताह में पांच दिन) सुनवाई शुरू हुई. फिलहाल हिंदू पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद मुस्लिम पक्ष शीर्ष अदालत में अपनी दलीलें रख रहा है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Chief Justice Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ (Constitutional Bench) मामले की सुनवाई कर रही है. इसमें जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर भी हैं.
दोनों पक्षों के मुताबिक, सुनवाई के साथ हो सकती है बात
फिर से बातचीत चाहने वाले दोनों पक्षकारों को लगता है कि मुख्य न्यायाधीश के लिए इसकी अनुमति देने में कोई दिक्कत पेश नहीं आएगी. बातचीत की यह कवायद सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के साथ भी चल सकती है. बता दें कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और राम जन्मभूमि न्यास की वजह से बात बिगड़ने से पहले तक दोनों पक्ष अंतिम निर्णय तक पहुंच ही चुके थे. इसमें मुस्लिम पक्ष विवादित स्थल पर दावा छोड़ने वाला था. मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए फंड और दूसरी जगह दी जानी थी.






