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अयोध्या मामला: NBSA का TV चैनलों को परामर्श, तनाव पैदा करने वाली बहस से रहें दूर

नई दिल्ली: समाचार प्रसारण व मानक प्राधिकरण (NBSA) ने सभी टैलीविजन चैनलों को परामर्श जारी किया कि वे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में खबर देते वक्त ‘सतर्कता’ बरतें और तनाव पैदा करने वाली ‘भड़काऊ बहस’ से दूर रहें। NBSA समाचार चैनलों के लिए स्व नियामक संस्था है। वहीं सलाह दी कि अयोध्या मामले पर किसी भी समाचार में वे बाबरी मस्जिद ढहाए जाने से जुड़ी कोई फुटेज नहीं दिखाएं। चैनल अयोध्या मामले में लोगों के जश्न या प्रदर्शन दिखाने वाले दृश्य प्रसारित नहीं करे। वहीं अयोध्या विवाद की सुनवाई कर चुकी 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने वीरवार को मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट पर विचार-विमर्श किया। बैठक 2 सत्रों में हुई है।

धवन के खिलाफ कार्रवाई को हिन्दू पक्ष पहुंचा BCI
मुस्लिम पक्षकारों का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक हिन्दू पक्षकार ने बार काऊंसिल ऑफ इंडिया में शिकायत की। सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में अंतिम दिन की सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने कथित रूप से भगवान राम के जन्म स्थल को दर्शाने वाले एक नक्शे को फाड़ दिया था। अखिल भारत हिन्दू महासभा ने धवन की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए बार काऊंसिल आफ इंडिया को पत्र लिखा है। उधर राम जन्मभूमि न्यास से जुड़े राम विलास वेदांती ने वीरवार को कहा कि वह मुकद्दमा दर्ज कराने वाले थे लेकिन इससे रामलला का मामला प्रभावित न हो इसलिए इस विचार को फिलहाल स्थगित कर दिया।

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने की समझौते की पुष्टि
राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या भूमि विवाद मामले में मुस्लिम पक्षकारों में से एक सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने पुष्टि की कि मध्यस्थता पैनल के माध्यम से हिंदू पक्षों को एक समझौता प्रस्ताव पेश किया था। बुधवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थता पैनल ने एक सील कवर में एक रिपोर्ट दायर की थी जिसमें सूत्रों के अनुसार कुछ हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच समझौता हुआ था। मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता शाहिद रिजवी ने बताया कि अदालत के बाहर मध्यस्थता समिति के समक्ष दोनों पक्षों ने अपनी राय रख दी है और कुछ शर्तों पर एक मत हैं।

सुप्रीम कोर्ट में हारने वाले पक्ष के पास क्या होगा विकल्प
अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर अभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना है इसलिए इस पर सवाल शुरू हो गए हैं कि हारने वाले पक्ष के पास क्या-क्या विकल्प होंगे।

पहला-रिव्यू पटीशन शीर्ष अदालत से फैसला आने के 30 दिन के भीतर रिव्यू पटीशन डाली जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट की जिस बैंच से फैसला आया है, उसी के पास रिव्यू पटीशन देनी पड़ती है, लेकिन शर्त यह है कि पहली नजर में यह पता चल जाए कि जाने-अनजाने अदालत से कहां चूक हुई है।

दूसरा- क्यूरेटिव पटीशन सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने बताया कि इस न्यायिक हथियार का इस्तेमाल तब किया जाता है जब याची की रिव्यू पटीशन शीर्ष अदालत खारिज कर देती है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट को यह बताना पड़ता है कि फैसले के दौरान अमुक संवैधानिक बिंदू पर अदालत का ध्यान नहीं जा पाया।

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