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इस वजह से राहुल जौहरी और सबा करीब होंगे BCCI के निशाने पर

नई दिल्ली। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के नेतृत्व में आने वाली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) की पदाधिकारियों की नई फौज के निशाने पर सबसे पहले सीईओ राहुल जौहरी और जीएम (क्रिकेट परिचालन) सबा करीम होंगे क्योंकि राज्य क्रिकेट संघों के अधिकतर दिग्गज इनके रवैये से खुश नहीं हैं।

महिला टीम के सहायक स्टाफ की नियुक्ति को लेकर हुए हालिया विवाद ने बीसीसीआइ के नए पदाधिकारियों को मौका दे दिया है। मालूम हो कि 23 अक्टूबर को सौरव गांगुली अध्यक्ष, जय शाह सचिव, अरुण सिंह धूमल कोषाध्यक्ष, माहिम वर्मा उपध्यक्ष और जयेश जॉर्ज संयुक्त सचिव पद पर आसीन होंगे। बोर्ड के एक दिग्गज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के कार्यकाल के दौरान जौहरी और सबा ने मनमाने फैसले किए जिसका हिसाब लेने का समय आ गया है।

इनके अलावा भी कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में काफी शिकायतें हैं। उनकी भी जांच की जाएगी। महिला टीम के सहायक स्टाफ की नियुक्ति में की गई गलतियां तो एक बानगी है, ऐसे बहुत सारे फैसले हैं जिससे भारतीय क्रिकेट का नुकसान हुआ है। यही नहीं इनके कार्यकाल के दौरान बीसीसीआइ के पूर्व दिग्गजों और कई राज्य संघों के अधिकारियों की काफी बेइज्जती भी की गई। पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) में बीसीसीआइ का रुतबा घटा है जबकि बोर्ड के कुछ अधिकारियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।

इडुल्जी और रंगास्वामी भड़कीं

सीओए सदस्य डायना इडुल्जी और बीसीसीआइ की शीर्ष परिषद की नई सदस्य शांता रंगास्वामी ने बोर्ड के सीईओ राहुल जौहरी को पत्र लिखकर महिला राष्ट्रीय टीम के लिए सहायक स्टाफ की ‘असंवैधानिक’ नियुक्ति पर सवाल उठाए। सबा करीम महिला क्रिकेट से जुड़े मामले देखते हैं। इन नियुक्तियों के लिए वह संदेह के घेरे में हैं। हेमलता काला की अगुआई वाली महिला चयन समिति ने एक दिन पहले सीईओ को मेल लिखकर दावा किया था कि उन्हें सहयोगी स्टाफ की नियुक्ति प्रक्रिया से दूर रखा गया था। इडुल्जी और रंगास्वामी ने इस रवैये की आलोचना की। मालूम हो कि 23 अक्टूबर से पहले वर्तमान अधिकारी अपने मनमुताबिक फैसले ले रहे हैं।

बीसीसीआइ के नए संविधान के अनुसार चयनकर्ता ही पुरुष और महिला राष्ट्रीय टीम के सहयोगी स्टाफ की नियुक्त करते हैं। हाल में पुरुष टीम के सहायक स्टाफ की नियुक्ति के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया गया था। इडुल्जी ने सीईओ को भेजे ईमेल में लिखा है कहा कि मुझे शांता से भी ईमेल मिला है। इसे आपको और चयनकर्ताओं को भी भेजा गया है जिसमें उन्होंने बताया है कि ये चीजें जानबूझकर की गईं ताकि शीर्ष पर बैठे लोग अपने व्यक्तियों को गलत तरीके से इन पदों पर बिठा लें। यह बहुत ही गंभीर आरोप है। उन्होंने लिखा कि यह राष्ट्रीय भारतीय टीम है जो यात्रा कर रही है और उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। मुझे हैरानी है कि क्या आप पुरुष टीम के साथ भी ऐसा ही करोगे? इस पूरे विवाद का केंद्र सबा करीम हैं, जिनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह ईमेल सीईओ को लिखा गया है तो बेहतर यही होगा कि उनसे बात करो।

चयन के लिए गलत प्रक्रिया अपनाई गई : 63 वर्षीया इडुल्जी ने पत्र में लिखा कि महिला चयनकर्ताओं द्वारा आपको लिखे गए ईमेल को पढ़कर मैं हैरान हूं कि वीडियो विश्लेषक के चयन के लिए गलत प्रक्रिया अपनाई गई। यह और भी चिंता की बात है कि पुष्कर सावंत वेस्टइंडीज के लिए फ्लाइट भी बुक करा चुके हैं जिन्हें सबा करीम और एनसीए इस पद पर चाहते थे। यह पूरी प्रक्रिया ही आंखों में धूल झोंकने वाली लगती है। महिला चयनकर्ताओं ने दावा किया है कि उन्हें महिला टीम के गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण कोच की नियुक्ति के लिए भी विश्वास में नहीं लिया गया था। उन्हें सिर्फ वीडियो विश्लेषक की भूमिका के लिए साक्षात्कार कराने को कहा गया जिसके लिए प्रक्रिया शुक्रवार को समाप्त हुई। इडुल्जी और रंगास्वामी ने दावा किया कि वीडियो विश्लेषक की भूमिका के लिए भी नियमों का उल्लंघन किया गया। एनसीए के गेंदबाजी कोच नरेंद्र हिरवानी और टी. दिलीप भारतीय महिला टीम के साथ क्रमश: गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण कोच के रूप में वेस्टइंडीज जाएंगे।

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