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B’day special: जय-वीरू जैसी है मोदी और शाह की दोस्ती, ऐसे हुई थी दोनों की पहली मुलाकात

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित अनिलचंद्र शाह आज अपना 55वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर पक्ष और विपक्ष के नेता उनको बधाई दे रहे हैं। 22 अक्तूबर, 1964 को मुंबई के संपन्न गुजराती परिवार में जन्मे अमित शाह को आज की मौजूदा राजनीति का चाणक्य माना जाता है। शाह का शेयर ब्रोकर से राजनीति का शहंशाह बनने तक का सफर काफी दिलचस्प रहा क्योंकि उनका राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था लेकिन जब से उन्होंने भाजपा की कमान संभाली, पार्टी को कई मुकाम दिलाए।

ऐसे हुई शाह-मोदी की दोस्ती
16 साल की उम्र से ही अमित शाह ने आरएसएस से जुड़कर उनकी शाखाओं में जाना शुरू कर दिया था। उसी कड़ी में 1982 के आस-पास अहमदाबाद की नारणपुरा शाखा में शाह की मोदी से मुलाकात हुई थी। उस वक्‍त नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक थे और तब तक अपनी कुछ पैठ बना चुके थे। 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्‍यता ग्रहण करने के साथ ही अमित शाह ने सियासी दुनिया में कदम रखा। 1986 में उन्‍होंने भाजपा ज्‍वाइन की। उसी दौरान नरेंद्र मोदी को भी संघ से भाजपा में भेजा गया। इस तरह ये दोनों राजनेता लगभग एक ही दौर में भाजपा में शामिल हुए थे। संघ में हुई मोदी-शाह की मुलाकात आज एक गहरी दोस्ती में तबदील हो चुकी है।

मुश्किलों का कर चुके हैं सामना
देश की राजनीति को मोदी और अमित शाह ने बेहद करीब से देखा है। अगर शाह के साथ मोदी ने गुजरात में हैट्रिक पूरी की थी तो वहीं साल 2002 के दंगो का गम भी झेला है। यही नहीं अमित शाह जब जेल में थे तो उनके परिवार को भी संभालने का काम मोदी ने ही किया। यह आपस में दोनों की समझदारी और प्यार ही है जो मोदी ने सभी लोगों को दरकिनार करते हुए साल 2014 के आम चुनावों में यूपी का चुनाव प्रभारी अमित शाह को बनाया और उन्होंने मोदी को पार्टी की जीत का तोहफा दिया।

जब तल्ख हो गए मोदी और केशुभाई पटेल के रिश्ते
1996 में गुजरात भाजपा के सीनियर नेता केशुभाई पटेल से मोदी के रिश्ते तल्ख हो गए, लेकिन शाह ने मोदी से अपनी दोस्ती बरकरार रखी। साल 2001 में मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे तो शाह को मंत्री बनाया। तब उनकी उम्र सिर्फ 37 साल थी। इससे गुजरात की सियासत में बैठे लोगों को मोदी की नजर में शाह की अहमियत का अंदाजा हो गया था। 24 जनवरी 2016 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दोबारा से चुना गया और वो अभी तक इस पद पर बने हुए हैं। वहीं मोदी सरकार दूसरी बार 2019 में जब बहुमत के साथ केंद्र में आई तो अमित शाह को केंद्रीय गृहमंत्री का पदभार सौंपा गया। बतौर गृहमंत्री अमित शाह ने जो अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया वो है जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाना।

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