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निर्भया के चारों दोषियों को मिल सकती है सजा-ए-मौत ! 7 दिन बाद होगा किस्मत का फैसला

दिल्ली के 2012 के निर्भया बलात्कार कांड के चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारी शुरू कर हो गई है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने इन्हें नाेटिस जारी किया है अगर सात दिन के अंदर मृत्युदंड के खिलाफ राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दाखिल नहीं की तो उन्हे ‘सजा-ए-मौत’ मिल सकती है।

जेल प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस में पूछा गया है कि क्या वह 7 दिन के भीतर दया याचिका दाखिल करेंगे, अगर नहीं तो तिहाड़ जेल प्रशासन आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने बताया कि गैंगरेप के आरोपी अक्षय, विनय और मुकेश तिहाड़ जेल में जबकि आरोपी पवन मंडोली जेल में बंद है। एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ में आत्महत्या कर ली थी। चारों आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से मिली सजा-ए-मौत पर हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में भी मुहर लगाई जा चुकी है।

बता दें कि आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से मिली फांसी की सजा के खिलाफ याचिका डालने का अधिकार था। उसके बाद रिव्यू-पिटिशन (पुनर्विचार याचिका) भी मुजरिम डाल सकते थे, चारों ने मगर इन दो में से किसी भी कदम पर अमल नहीं किया। आरोपी सजा-ए-मौत के खिलाफ राष्ट्रपति के यहां भी इस अनुरोध के साथ याचिका दाखिल कर सकते थे कि उनकी सजा-ए-मौत घटाकर उम्रकैद में बदल दी जाए।

संविधान के अनुच्छेद 72 के मुताबिक, राष्ट्रपति फांसी की सजा को माफ या स्थगित कर सकते हैं। हालांकि  राष्ट्रपति अपनी मर्जी से ऐसा नहीं कर सकते। विधान में साफ कहा गया है कि राष्ट्रपति मंत्री परिषद से सलाह लेकर ही सजा माफ कर सकते हैं या उसमें छूट दे सकते हैं।

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