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चक्रवात ‘बुलबुल’ की विनाशलीला देखने पहुंचीं ममता, मृतकों के परिजनों को दो लाख का मुआवजा

कोलकाता। भीषण चक्रवाती तूफान ‘बुलबुल’ ने बंगाल के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। चक्रवात बुलबुल की तबाही का आकलन करने सोमवार सुबह बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हवाई सर्वेक्षण करने पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने आकाश मार्ग से दक्षिण 24 परगना जिले के नामखाना, बकखाली व अन्य इलाकों में बुलबुल की विनाशलीला का मुआयना किया और इसके बाद वे काकद्वीप में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक बैठक की।

बैठक में परिस्थिति के मुकाबला के लिए मुख्य सचिव के नेतृत्व में टास्क फोर्स गठित करने को लेकर निर्देश दिया जो 48 घंटे के अंतराल में परिस्थितियों की समीक्षा करेगी। साथ ही, मृतकों के परिजनों को दो लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

ममता बनर्जी ने कहा कि बुलबुल के कारण तकरीबन 5-6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। दो लाख मकानों को नुकसान पहुंचा है। उत्तर 24 परगना जिले में पांच लोगों की मौत हुई है। पूर्व मेदिनीपुर जिले में भी एक व्यक्ति बुलबुल का शिकार बना है। दक्षिण 24 परगना जिले में तूफान ने एक की जान ले ली है। एक लाख 68 हजार लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया है।

बेहतर कार्य के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की सराहना की

मुख्यमंत्री ने चक्रवात से निपटने में अधिकारियों के कार्य प्रणाली की प्रशंसा की और कहा कि जिस तरह से पश्चिम बंगाल में बुलबुल का मुकाबला किया गया है, उसकी तारीफ भारत सरकार कर रही है। जिला अधिकारी को कहा कि एक केंद्रीय पर्यवेक्षक राज्य में मुआयना करने आ रहा है उनके साथ सभी प्रकार से सहयोग किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव को साथ लेकर ममता ने जिला अधिकारियों से बुलबुल के कारण हुए नुकसान का ब्यौरा भी मांगा।

प्रभावित क्षेत्र के 100 फीसद फसलों को मिलेगा बीमा लाभ 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पान व धान के फसलों को भारी नुकसान हुआ है। जिले के कृषि अधिकारी से ममता ने फसल बीमा को लेकर सवाल किया जिस पर उन्होंने कहा कि यहां केवल एक लाख 15 हजार हेक्टेयर जमीन पर लगे फसलों की ही बीमा हो सकी है। इसी के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्र के 100 फीसद फसलों को फसल बीमा के तहत पंजीकृत करने का निर्देश दिया।

परिस्थिति पर नजर रखेगी टास्क फोर्स, क्षतिग्रस्त आवासों का होगा पुनर्निर्माण 

ममता बनर्जी ने कहा कि अभी राज्य में पूरी तरह से ठंड आने में देर है। ऐसे में मौसम कोई बाधक नहीं बनने वाला। मुख्य सचिव के नेतृत्व में टास्क फोर्स प्रारंभ में 48 घंटे के अंतराल में परिस्थितियों का मुआयना करेगी, जिसे बाद में और बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिस्थितियां जल्द सामान्य हो इसे लेकर अधिकारियों को और तत्परता से काम करना होगा। वहीं, चक्रवात में क्षतिग्र्रस्त हुए मकानों को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि मकानों का निर्माण राज्य सरकार संचालित आवासीय योजना के तहत किया जाएगा।

चक्रवात बुलबुल ने कोलकाता को किया प्रदूषण मुक्त

भले ही चक्रवात बुलबुल के कहर तले दक्षिण व उत्तर 24 परगना, नदिया समेत अन्य कई तटवर्ती इलाके प्रभावित हुए हो। लेकिन कोलकाता व आसपास के उपनगरीय इलाकों में भारी बारिश होने से दीपावली के बाद व्याप्त प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गई है, जो शहरवासियों के लिए खुशी खबरी है। दरअसल, महानगर में दीपावली व छठ पूजा के दौरान व्यापक आतिशबाजी से यहां प्रदूषण का स्तर सामान्य से 17 गुना अधिक बढ़ गया था।

वहीं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया था कि दीपावली के दौरान अत्याधिक आतिशबाजी के कारण महानगर की हवा में प्रदूषण का सूचकांक 863 पर पहुंच गया था, जो सामान्य से करीब 17 गुना अधिक रहा। साथ ही बताया गया कि हवा में प्रदूषण कारक तत्वों की मात्रा अगर 50 मिलीग्राम हो तो वह सामान्य मानी जाती है और जैसे ही यह आंकड़ा 200 पर पहुंचता है, उसे खतरनाक की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे में कोलकाता में दीपावली व छठ पूजा के बाद से प्रदूषण शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ था। लेकिन चक्रवात बुलबुल के प्रभाव में निर्मित निम्न दबाव के कारण हुई भारी बारिश ने प्रदूषित कोलकाता व आसपास के इलाकों को काफी हद तक प्रदूषण मुक्त करने का काम किया है।

चक्रवात बुलबुल से बंगाल में दस लोगों की गई जान

चक्रवाती तूफान बुलबुल ने शनिवार रात बंगाल में दस्तक दी और रविवार तड़के तक नौ जिलों में जमकर तांडव मचाया। राज्य के प्रभावित नौ जिलों में 10 लोगों की मौत की सूचना है। हजारों घरों व पेड़ों के ढहने की खबरें लगातार आ रही हैं। तेज हवाओं और भारी बारिश से तटीय जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। सबसे ज्यादा प्रभाव बकखाली, फ्रेजरगंज, संदेशखाली, झड़खाली, नंदीग्राम, नयाचर और खेजूरी इलाकों में पड़ा।

राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री जावेद खान ने बताया कि राज्य भर में चक्रवात से कुल 2.73 लाख लोग प्रभावित हैं। इसमें से 1.78 हजार लोगों को राहत शिविर में रखा गया है। चक्रवात से पूरे राज्य में 2473 घर ध्वस्त हो गए हैं। लगभग 26000 घरों को आंशिक नुकसान हुआ है। जावेद खान ने बताया कि प्रभावित लोगों के बीच राज्य सरकार ने 43000 तिरपाल भी वितरित किए हैं।

सबसे ज्यादा, पांच लोगों की मौत उत्तर 24 परगना के बशीरहाट इलाके में हुई हैं। मरने वालों में 7 की पहचान सुचित्रा मंडल (70), रेबा विश्वास (47), मनिरुल गाजी (59), सुदीप भक्त (15), सुजाता दास, संजय दास और समीर मजूमदार के रूप में हुई। एक युवक की मौत शनिवार रात में ही हो गई थी, जिसका नाम मोहम्मद सोहेल। वहीं संदेशखाली और ¨हगलगंज में भी पेड़ गिरने से दब कर दो महिलाओं की मौत हुई है। सुचित्रा बसीरहाट के पूर्व मकाला की रहने वाली थी। वहीं, रेबा गोखना की रहने वाली थी। मनीरूल गाजी पश्चिम मेदिनीपुर का रहने वाला था, जिस पर बिजली का खंभा गिरने से उसकी मौत हुई थी। सुदीप नोदाखाली का रहने वाला था।

केंद्र से मिला मदद का आश्वासन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फोन कर बुलबुल से हुई तबाही की जानकारी ली। केंद्र की ओर से आपात स्थिति में राज्य की हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि चक्रवात की स्थिति और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के मद्देनजर उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की। रविवार को राज्य सरकार ने केंद्र को बताया कि बुलबुल चक्रवात के चलते बंगाल के नौ जिलों में कुल तीन लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

इधर, मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने नौ जिलों के जिलाधिकारियों को तबाही की पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए पीएमओ से बात की और हालात की जानकारी दी। इसमें कई अधिकारी मौजूद थे।

135 किमी की रफ्तार से चलीं हवाएं

मौसम विभाग की ओर से रविवार को एक बुलेटिन जारी कर चक्रवात बुलबुल पर पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चक्रवात शनिवार रात सुदरवन के धानाची इलाके से रात 8.30 से 11.30 के बीच गुजरा। इस दौरान भारी बारिश के बीच 110 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं लगातार चलीं जो एक समय 135 किमी तक भी पहुंच गई थीं। मौसम विभाग के अनुसार जमीन पर आने के बाद चक्रवात धीरे-धीरे कमजोर हो कर निम्न दबाव में परिवर्तित हो जाएगा। चक्रवात बंगाल से बांग्लादेश के उत्तरपूर्वी तटवर्ती इलाकों की ओर बढ़ गया है।

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