ब्रेकिंग
Dhamanheri Youth Death in UK: बेहतर भविष्य के सपने लेकर इंग्लैंड गए 20 वर्षीय कंवलजीत की अचानक मौत Rewari Food Poisoning News: रेवाड़ी में कन्या पूजन का प्रसाद खाने से तीन बच्चियों की तबीयत बिगड़ी, द... Kurukshetra Police Encounter: कुरुक्षेत्र में पुलिस और नशा तस्करों के बीच जबरदस्त मुठभेड़, 40 लाख का... Tiger Shroff Firing Case: मात्र 34 हजार रुपए में ली गई थी टाइगर की सुपारी, कोटा से गिरफ्तार हुए तीनो... Haryana Police Transfer: हरियाणा में पुलिस विभाग का बड़ा फेरबदल, 28 IPS-HPS अधिकारियों के तबादले Neeraj Kumar Health Update: JDU MLC उम्मीदवार नीरज कुमार को पड़ा दिल का दौरा, पटना के मेदांता अस्पता... Jharkhand Drugs Syndicate: झारखंड में NCB का बड़ा एक्शन, रांची और जमशेदपुर से मास्टरमाइंड जिम्मी समे... Tiger Shroff Firing Case Update: टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में कोटा से तीनों आरोपी गिरफ्तार, फुटबॉल ... Stock Market Holiday Today: विजयादशमी पर आज बंद रहेगा शेयर बाजार, जानें कब होगी नॉर्मल ट्रेडिंग और क... Karnataka Crime News: कर्नाटक के विजयपुरा में अवैध संबंध के चक्कर में रची गई खौफनाक साजिश, पत्नी ने ...
उत्तरप्रदेश

मक्का के प्रक्षेत्रों पर जा कर लगाई गई रबी मक्का का वैज्ञानिक टीम ने किया अवलोकन

बहराइच। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमागंज, अयोध्या, के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, नानपारा, बहराइच की वैज्ञानिक टीम ने रबी मक्का के प्रक्षेत्रों पर कृषकों के यहां जा कर लगाई गई रबी मक्का का अवलोकन किया।

डॉ महेंद्र सिंह, प्रभारी अधिकारी, फसल अनुसंधान केंद्र, बहराइच ने बताया कि मक्का एक बहुपयोगी खरीफ, रबी, और जायद तीनों ऋतुओं में बोई जाने वाली फसल है। इस समय रबी मक्के की फसल बढ़वार की विभिन्न अवस्थाओं में खेतों पर खड़ी है। मौसम में हो रहे उतार चढ़ाव की वजह से इसमें कुछ विनाशकारी कीट-रोगों का प्रकोप होने की संभावना है। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. के. एम. सिंह ने बताया कि कीट-रोग नियंत्रण हेतु सप्ताह में 2 से 3 बार फसल का निरीक्षण करना अति आवश्यक है साथ ही संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इस के अतिरिक्त खेत में पड़े खरपतवार, मृत गोभ एवं फसल अवशेषों को नष्ट करना चाहिए। डॉक्टर एस बी सिंह ने बताया कि मक्का को मेढ़ पर लगाया जाए तो और अधिक उत्पादक लिया जा सकता है। केंद्र के पादप प्रजनन वैज्ञानिक डॉ अरूण कुमार ने बताया मक्का की पोपकोर्न, स्वीटकॉर्न, बेबीकॉर्न जातियों को उगाने से किसान अधिक लाभ कमा सकता है। केंद्र की पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. हर्षिता ने बताया कि सैनिक सूड़ी, तना छेदक, बालदार सूड़ी एवं कटुआ कीट द्वारा तने, पत्तियों और बालियों को काफी क्षति पहुंचाई जाती है साथ ही साथ इस मौसम में पत्ती झुलसा रोग का भी प्रकोप होता है। फल स्वरूप उत्पादन में भारी कमी आ जाती है। पत्ती झुलसा रोग एक कवक जनित रोग है जिसकी प्रारंभिक अवस्था में पौधों की निचली पत्तियों पर अंडाकार या नाव के आकार के भूरे धब्बे दिखाई देते हैं तथा रोग की भयंकर अवस्था होने पर पत्तियां सूख जाती हैं और संपूर्ण पौधा नष्ट हो जाता है। इतना ही नहीं पौधों में अपरिपक्व एवं दाने रहित भुट्टे होने के कारण उपज में भारी कमी आ जाती है। इस रोग के नियंत्रण के लिए मैनकोज़ेब कवक नाशक दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर दो से तीन छिड़काव 10-15 दिनों के अंतराल पर सुरक्षात्मक दृष्टि से करना लाभप्रद होता है। इसके अतिरिक्त फसल कटाई के उपरांत फसल अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए क्योंकि इस रोग के रोग कारक रोगी पौधों के अवशेषों पर भी जीवित रहते हैं। तना छेदक कीट के निदान हेतु बुवाई के 20 से 25 दिन बाद कार्बोब्यूरॉन 3% ग्रेन्यूल 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें अथवा बुवाई के 2 से 5 सप्ताह बाद क्यूनाॅलफाॅस दवा 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। सैनिक सूड़ी मक्का की फसल में लगने वाला घातक कीट है।इसके लिए ईमामेक्टिन बेंजोएट 5% एस. जी. 1ग्राम प्रति 2 लीटर पानी या 9:1 बालू और चुना को मिलाकर प्रत्येक पौधे के गोफ (अगोला) में डालें। इसके अतिरिक्त इनडाॅक्साकार्ब 500 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर के घोल का छिड़काव भी लाभप्रद होता है। जैव नियंत्रण हेतु एन.पी.वी 250 एल. ई. अथवा मैटाराईजीएम अनीसोप्लि 5 ग्राम प्रति लीटर पानी या नीम का तेल 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना प्रभावी होता है।

Related Articles

Back to top button