ब्रेकिंग
Goraya-Phillaur Highway Accident: जालंधर-लुधियाना हाईवे पर ट्राले और बाइक की भीषण टक्कर; लुधियाना के... Jalandhar Powercom Action: जालंधर में बिजली बोर्ड का बड़ा एक्शन, नगर निगम की अवैध स्ट्रीट लाइटों के ... Punjab ED Action: मंत्री संजीव अरोड़ा के बाद अब पावरकॉम चेयरमैन पर शिकंजा; ईडी की पूछताछ टली, अब 20 ... Punjab Weather Update: पंजाब में 18 से 23 मई तक भीषण लू का अलर्ट; बठिंडा में पारा 43 डिग्री पार, जान... Ludhiana Cyber Fraud: दिन में बेचता था सब्जी, रात को बनता था इंटरनेशनल साइबर ठग; लुधियाना में मुनीश ... PSPCL Smart Phone Controversy: पावरकॉम में महंगे स्मार्ट फोन बांटने पर बवाल; बिजली कर्मचारियों ने लग... Ludhiana Crime News: लुधियाना में घिनौना जालसाजी; मृत पत्नी को जिंदा बताकर बैंक से लिया 12.81 लाख का... Yamunanagar Kidnapping Attempt: यमुनानगर में 10 साल के बच्चे के अपहरण का प्रयास, बाइक से गिरा मासूम ... Gurugram Crime News: गुड़गांव में जनगणना ड्यूटी में लापरवाही पर बड़ा एक्शन, 10 सरकारी कर्मचारियों के... Faridabad EV Fire: फरीदाबाद में चलती इलेक्ट्रिक स्कूटी बनी आग का गोला, धुआं निकलते ही चालक ने कूदकर ...
मध्यप्रदेश

मध्‍य प्रदेश में नर्सिंग कालेजों में हुई गड़बड़ियों की सीबीआइ ने शुरू की जांच

भोपाल। प्रदेश के नर्सिंग कालेजों में हुई गड़बड़ियों की जांच सीबीआइ ने शुरू कर दी है। 2017 के बाद जिन कालेजों को नर्सिंग काउंसिल ने मान्यता दी थी, उन सभी की जांच की जाएगी। साथ ही नर्सिंग काउंसिल और मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने मान्यता देने और पर्यवेक्षण में जो गड़बड़ी की है, उसकी भी जांच होगी। इस सिलसिले में सीबीआइ की टीम अलग-अलग जगह जाकर दस्तावेज जब्त कर रही है। टीम शनिवार को ग्वालियर गई थी। मंगलवार को विदिशा के कुछ नर्सिंग कालेजों से दस्तावेज लेने के साथ ही पूछताछ की गई है। सुप्रीम कोर्ट से स्थगन मिलने के चलते 35 नर्सिंग कालेजों को फिलहाल जांच से बाहर रखा गया है। बता दें कि करीब तीन माह पहले ग्वालियर हाईकोर्ट ने सीबीआइ को जांच सौंपी थी, पर कालेजों के सुप्रीम कोर्ट चले जाने की वजह से जांच शुरू नहीं हो पाई थी। इसके बाद सीबीआइ ने विधिक राय लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने वाले कालेजों को छोड़कर बाकी जांच शुरू की है।

जरूरी दस्तावेज मिल पाना मुश्किल

सीबीआइ को जांच के लिए जरूरी दस्तावेज मिल पाना मुश्किल है। इसकी वजह यह कि 2018 के बाद जिन कालेजों की मान्यता नर्सिंग काउंसिल ने दी थी, उनके रिकार्ड के नाम पर सिर्फ कालेज भवन का फोटो और नगर निगम की अनुमतियां ही ली गई थीं। दरअसल, 2018 के पहले तक नर्सिंग कालेज खोलने के लिए डिजायरिबलिटी एवं फिजिबिलिटी प्रमाण पत्र चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की तरफ से जारी किया जाता था। यह प्रमाण पत्र स्थल का निरीक्षण, शिक्षकों का भौतिक सत्यापन, पुस्तकालय आदि देखने के बाद दिया जाता था। 2018 के बाद से इस प्रमाण पत्र की बाध्यता खत्म कर दी गई। इस कारण जमकर मनमानी हुई।

इस तरह की गई गड़बड़ी

– नर्सिंग काउंसिल द्वारा कालेज भवन और पर्याप्त संसाधन नहीं होने पर भी मान्यता दी गई।

– कालेजों का नियमित निरीक्षण नहीं कराया गया।

– एक ही शिक्षक (फैकल्टी) का नाम कई कालेजों में दर्ज था।

Related Articles

Back to top button