ब्रेकिंग
कांवड़ यात्रा नियम: सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने के बाद भी रखें इन बातों का ध्यान, न करें ये गलतियां कश्मीरी विस्थापितों की वापसी पर संसदीय पैनल की रिपोर्ट: सुरक्षा व आजीविका के आकलन का निर्देश, मिलेगा... आबान की मौत से गहरे सदमे में अली: 2 दिनों से नहीं खाया खाना; हाईकोर्ट ने जनाजे के लिए अली व उमर को द... नोएडा एक्सटेंशनवासियों के लिए खुशखबरी: सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 तक दौड़ेगी मेट्रो; N... हिमाचल के चंबा में दर्दनाक सड़क हादसा: तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर बस खाई में गिरी, ड्राइवर-कंडक्टर समेत 7... आसाराम के बेटे नारायण साईं को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं: गुजरात हाईकोर्ट वापस भेजा मामला, 3 महीने म... "राजनीति में आकर भी अंडों से डर लगता है?" TMC सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, याचिका खा... छिंदवाड़ा में सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन, शिकायतों पर CMHO, तहसीलदार और पटवारी तत्काल सस्पेंड NEET 2026 धांधली: परीक्षा से 3 दिन पहले लीक हुए थे पेपर! CBI चार्जशीट में NTA विषय विशेषज्ञों और सीक... E20 इथेनॉल पेट्रोल पर सियासत तेज: राहुल गांधी बोले— 'जनता की जेब से चुरा रहे पैसे', पेट्रोलियम मंत्र...
मध्यप्रदेश

दुष्‍यंत संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज का निधन, सीएम शिवराज ने जताया शोक

 भोपाल ।    दुष्यंत कुमार स्‍मारक पांडुलिपि संग्रहालय के संस्थापक निदेशक राजुरकर राज का निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे। उन्‍होंने करीब 25 साल पहले अपने घर के दो कमरों में यह संग्रहालय शुरू किया था। वह विविध भारती, भोपाल से वरिष्‍ठ उद्घोषक के पद से सेवानिवृत्‍त हुए थे। उनकी बेटी विशाखा ने बताया कि वह कई सालों से बीमार थे। उन्हें पैंक्रियाज में ट्यूमर था, जिसका पांच बार आपरेशन करवा चुके थे और अब आयुर्वेद से इलाज करवा रहे थे। लेकिन पिछले दो माह से उनकी तबियत काफी बिगड़ गई थी और लगातार खराब होते स्वास्थ्य के कारण वे बैतूल के पास अपने पैतृक गांव में ही रहकर अपना इलाज करवा रहे थे। इलाज के दौरान मंगलवार रात को उनका देहांत हो गया। राजुरकर के निधन से साहित्‍य जगत में शोक की लहर है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके निधन पर शोक व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍हें श्रद्धांजलि दी है। सीएम शिवराज ने ट्वीट करते हुए लिखा कि दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के संस्थापक श्री राजुरकर राज जी के निधन का दु खद समाचार प्राप्त हुआ है। स्निग्धयुक्त मुस्कुराहट ए वह जीवन भर साहित्य के संवर्द्धन, संरक्षण व सम्प्रेषण के लिए समर्पित रहे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें।’

Related Articles

Back to top button