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हर शाम करें ये एक काम, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति

हिंदू धर्म में देवी देवताओं की पूजा को सर्वोत्तम माना गया है। मान्यता है कि अगर देवी देवताओं की पूजा पूरे मन और विधि विधान के साथ की जाए तो साधक को विशेष लाभ की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के कष्टों का भी अंत हो जाता है।

ऐसे में अगर रोजाना शाम की पूजा में चण्डी स्तोत्र का संपूर्ण पाठ किया जाए तो माता रानी की भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है जिससे सभी दुख परेशानियों व कष्टों का निवारण हो जाता है और हर प्रकार के सुख में वृद्धि होती है, तो आज हम आपके लिए लेकर आए है चण्डी स्तोत्र का संपूर्ण पाठ।

चण्डी स्तोत्र-

॥ ॐ श्री देव्यै नमः ॥
॥ अथ चंडीपाठः ॥
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता।
नमस्तस्यै ९४ नमस्तस्यै १५ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-१६॥
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।
नमस्तस्यै ९७ नमस्तस्यै १८ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-१९॥
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै २० नमस्तस्यै २१ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-२२॥
| या देवी सर्वभूतेषु निद्रारुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै २३ नमस्तस्यै २४ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-२५11
या देवी सर्वभूतेषु भुधारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै २६ नमस्तस्यै २७ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-२८।।
या देवी सर्वभूतेषु दृछायारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्ये २९ नमस्तस्ये ३० नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-३१।।
| या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ३२ नमस्तस्ये ३३ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-१४॥
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता ।।
तमस्तस्य३४ नमस्तस्य३६ नमस्तस्यै नमो नमः ।
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरुपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै ३८ नमस्तस्यै ३९ नमस्तस्यै नमो नमः || ५-४०॥
या देवी सर्वभूतेषु जातिरुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ४१ नमस्तस्यै ४२ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-४३॥
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ४४ नमस्तस्यै ४५ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-४६॥
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ४७ नमस्तस्यै ४८ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-४९॥
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धासपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ५० नमस्तस्यै ५१ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-५२॥
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्ये ५३ नमस्तस्यै ५४ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-99॥
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरुपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ५६ नमस्तस्यै 95 नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-५८॥
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ५९ नमस्तस्ये ६० लमस्तस्यै नमो नमः ॥ ५-६१।।
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरुपेण संस्थिता ।।
नमस्तस्यै ६२ नमस्तस्यै ६३ नमस्तस्यै नमो नमः || ६-६४॥
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्य ६७ नमस्तस्यै ६६ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-६७।।
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।
नमसलय ६८ नमस्तस्य ८९ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-००।
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै ७९ नमस्तस्यै ७२ नमस्तस्यै नमो नमः ॥७३॥
या देवी सर्वभूतेषु भान्तिरुपेण संस्थिता ।।
नमस्तस्यै ७४ नमस्तस्यै ७५ नमस्तस्यै नमो नमः ॥५-७६॥
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानाञ्चाखिलेषु या।
भूतेषु सततं तस्यै व्याप्तिदेव्यै नमो नमः ॥ ५-७७॥
चितिरुपेण या कस्नमेतद व्याप्य स्थिता जगत्।
नमस्तस्यै ७८ नमस्तस्यै ७९ नमस्तस्यै नमो नमः ॥ ८० ॥
॥ इति चंडीपाठ ॥

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