ब्रेकिंग
Hyderabad Fire Tragedy: हैदराबाद फर्नीचर शोरूम में भीषण आग, बेसमेंट में जिंदा जले 5 लोग, 22 घंटे बाद... अकील अख्तर ने थामा पतंग का साथ! झारखंड में AIMIM का बड़ा दांव, पाकुड़ की राजनीति में मचेगी हलचल मिर्जापुर जिम धर्मांतरण मामला: कोर्ट ने आरोपी इमरान को भेजा जेल, 14 दिन की जुडिशियल रिमांड पर फैसला Singrauli Mine Collapse: सिंगरौली में बड़ा हादसा, मिट्टी की खदान धंसने से 3 लोगों की मौत, 2 की हालत ... MBMC Election Results 2026: मीरा भयंदर में बीजेपी का दबदबा, लेकिन मेयर की कुर्सी के लिए विपक्षी एकजु... Suicide Case: पिता ने टोकना तो नाराज हुआ बेटा, ऑटो के अंदर फंदा लगाकर दी जान; परिजनों का रो-रोकर बुर... Gwalior Crime: ग्वालियर में 'लुटेरी दुल्हन' गैंग का भंडाफोड़, शादी के नाम पर ठगने वाली दुल्हन समेत 7... ईरान: आयतुल्ला खामेनेई का बड़ा फैसला, बेटे मसूद को बनाया सुप्रीम लीडर दफ्तर का प्रमुख; जानें वजह Natural Pest Control: चींटी, कॉकरोच और मच्छरों से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय, नोट करें ये नेचुरल टिप... BBL 2026 Winner: पर्थ स्कॉर्चर्स ने छठी बार जीता खिताब, MI और CSK का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास
देश

क्या महाराष्ट्र की सियासत ‘ठाकरे बंधुओं’ को फिर से ले आएगी एक साथ?

इतिहास में पहली बार ठाकरे परिवार का कोई सदस्य एक मुख्यमंत्री के पद पर काबिज होने वाला है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे वीरवार को महाराष्ट्र की कमान संभालने जा रहे हैं। ऐसे में शिवसेना भी इस पल को यादगार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है, जिसके तहत बड़े नेताओं को शपथ ग्रहण समारोह का न्योता दिया जा रहा है। इस बीच सबकी निगाहें टिक गई है मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे पर है। माना जा रहा है कि उद्धव सभी गिले शिकवे भुलाकर राज ठाकरे को शपथग्रहण में बुलाने वाले हैं।

दरअसल राज ठाकरे को तेजतर्रार और ईमानदार नेता के तौर पर जाने जाते थे अधिकांश लोगों को उनमें बालासाहेब ठाकरे की छवि दिखती है। हालांकि 2004 में बालासाहेब ठाकरे द्वारा पुत्र उद्धव ठाकरे को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने के बाद यह परिवार दो धड़ों में बंट गया। इसका नतीजा यह निकला कि राज ठाकरे ने 2006 में महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली।

राज ठाकरे की पार्टी ने 2009 में विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई और 14 विधायक उनकी पार्टी के बने, लेकिन जैसे-जैसे वक्त आग बढ़ता गया, राज ठाकरे की सियासत सिकुड़ती गई। राज ठाकरे की पार्टी का 2014 और 2019 में सिर्फ 1-1 विधायक ही चुनाव जीत पाया। वहीं शिवेसना 2014 में 63 विधायकों और 2019 में 56 विधायकों के साथ राज्य की दूसरे सबसे बड़ी पार्टी बनी। अब माना जा रहा है कि राज ठाकरे के पास एक बार फिर से परिवार को मज़बूती देने का विकल्प है। उद्धव ठाकरे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि बाहर निकलने का फ़ैसला उनका था इसलिए वापस आने का फ़ैसला भी वो ही लेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button