ब्रेकिंग
ILBS का 'लिवर मिशन': दिल्ली मॉडल से होगा हर नागरिक का फ्री चेकअप, सरकार ने खोला मदद का पिटारा कंगना रनौत की बढ़ी मुश्किलें: किसान आंदोलन पर टिप्पणी मामले में कल बठिंडा कोर्ट में होंगी पेश मराठी कार्ड पर छिड़ा घमासान! भाजपा अध्यक्ष बोले- भाषा के नाम पर जहर न घोलें, वोटिंग से पहले सियासी प... मिसाइल से लेकर माइंडसेट तक... सेना प्रमुख ने समझाया क्या है 'शौर्य संप्रवाह', दुश्मनों के लिए बजाई ख... सावधान! उत्तर भारत में जारी है 'कोल्ड वेव' का कहर; रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी, जानें मौसम विभाग की नई चे... प्रयागराज माघ मेला: श्रद्धालुओं के बीच मची चीख-पुकार, दूसरे दिन भी भड़की आग; आखिर कहाँ है सुरक्षा इं... तनाव के बीच तेहरान से आया राहत भरा मैसेज: 'टेंशन मत लेना...', जानें ईरान में फंसे भारतीय छात्रों का ... शमशान से घर पहुंचने से पहले ही उजड़ गया परिवार! सीकर में भीषण हादसा, एक साथ उठीं 6 अर्थियां राणा बलचौरिया मर्डर केस में SSP मोहाली के बड़े खुलासे, गिरफ्तार शूटरों ने बताए चौंकाने वाले सच घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच खुले पंजाब के स्कूल, अभिभावकों ने उठाई छुट्टियां बढ़ाने की मांग
विदेश

पाकिस्तान में धूमधाम से मनाया गया हिंगलाज माता महोत्सव

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में विश्व प्रसिद्ध वार्षिक हिंगलाज माता महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। सोमवार को संपन्न हुए सदियों पुराने इस धार्मिक महोत्सव में पाकिस्तान और भारत के साथ अन्य देशों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वहीं, कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार भारतीय हिंदू इस महोत्सव में शामिल हुए।बलूचिस्तान प्रांत के लासबेला जिले के कुंड मालीर क्षेत्र में स्थित प्राचीन हिंगलाज माता मंदिर को हिंदू सभ्यता के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। यह दुनिया भर के पांच प्राचीन हिंदू मंदिरों में शुमार है। हिंदू देवी सती को समर्पित हिंगलाज मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है।

बलूचिस्तान के सीनेटर दिनेश कुमार ने कहा कि पिछले साल की तरह इस साल भी बड़ी संख्या में हिंदू तीर्थयात्री उत्सव में शामिल होने के लिए यहां पहुंचे, क्योंकि कोविड महामारी के कारण दो साल तक यह उत्सव आयोजित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय धार्मिक उत्सव में शामिल होने के लिए दूसरे देशों से सैकड़ों हिंदू आते हैं।कुमार ने कहा कि मकरान तटीय राजमार्ग के बनने के बाद अब इस ऐतिहासिक मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। पहले श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में काफी मुश्किल होती थी, क्योंकि यह किरथर पर्वत श्रृंखला की तलहटी में है। उन्होंने कहा कि बहुत से भक्त नंगे पांव पहाड़ों पर चढ़कर मंदिर तक जाना पसंद करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि मंदिर तक पहुंचने के लिए उन्हें जितना अधिक दर्द सहना होगा, उन्हें हिंगलाज माता उनकी मनोकामना पूरी करती हैं।

Related Articles

Back to top button