ब्रेकिंग
नाम के आगे 'शंकराचार्य' कैसे लगाया? मेला प्रशासन के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का करारा जवाब,... सुखबीर बादल का CM मान पर बड़ा हमला: बोले- मुख्यमंत्री में लोगों का सामना करने की हिम्मत नहीं, वादों ... कातिल चाइना डोर का कहर! युवक के चेहरे और नाक पर आए दर्जनों टांके, मौत के मुंह से बचकर लौटा पीड़ित Jalandhar Crime: रिटायर्ड कर्नल के साथ धोखाधड़ी, 9 लोगों पर FIR दर्ज; जानें जालंधर में ठगी का पूरा म... भगवंत मान सरकार के रोजगार के दावे फेल! पंजाब में फैला फर्जी ट्रैवल एजेंटों का मकड़जाल, विदेश भेजने क... Drug Smuggling Case: पुलिस की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों रुपये की हेरोइन बरामद; 2 तस्करों को रंगे हाथों ... शिक्षा क्रांति के दावों की खुली पोल! सरकारी स्कूलों में लेक्चरर्स का टोटा, बिना एक्सपर्ट्स के कैसे प... Ludhiana Weather: कोहरे की सफेद चादर में लिपटा लुधियाना, 22 और 23 जनवरी को आंधी-बारिश का डबल अटैक; म... आयुष्मान कार्ड धारकों को बड़ा झटका! 45 निजी अस्पताल योजना के पैनल से बाहर, इलाज के लिए दर-दर भटकने क... Haryana Agniveer Quota: हरियाणा में अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! इस सरकारी भर्ती में मिलेगी प्राथ...
मध्यप्रदेश

आपातकाल की यातनाओं का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की लाइब्रेरी में आज भी है सुरक्षित

खंडवा। मीसाबंदी के काले अध्याय और यातनाओं का रिकार्ड आज भी आस्ट्रेलिया की एक लाइब्रेरी में सुरक्षित है। सरकार को इसे भारत लाना चाहिए। यह कहना है मीसाबंदी और लोकतंत्र सेनानी संघ के जिला संयोजक सुरेंद्र अग्रवाल का। नईदुनिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि आपातकाल के बाद सत्ता में आई मोरारजी भाई देसाई की सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान की गई तानाशाही, प्रजातंत्र पर प्रहार, विपक्ष के साथ हुई बर्बरता और अत्याचारों की जांच के लिए शाह कमीशन का गठन किया गया था।

इसका रिकॉर्ड जनता दल की सरकार के जाते ही तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नष्ट करा दिया था। ऐसे में उस समय यातना झेलने वालों के अनुभव, पुस्तकों व अखबारों में दर्ज घटनाओं के अलावा कोई प्रमाणित दस्तावेज नहीं है।

आपातकाल के दौरान यातनाएं सहने वाले अधिकतर मीसाबंदियों की मौत हो चुकी है, शेष उम्रदराज हो चुके है। खंडवा जिले में 90 में से मात्र 36 मीसाबंदी ही बचे है। 25 जून 1975 की रात को लोकतंत्र के लिए कलंक बताते हुए सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि आपातकाल लागू होने पर देशभर में गैर कांग्रेसियों पर हुए अत्याचार और गिरफ्तारियों से खंडवा जिला भी नहीं बच सका था।

आधी रात तक शहर के पांच लोकतंत्र सेनानी हजारीलाल अग्रवाल, बाल गंगाधर शर्मा, चंद्रभान गाभा, धरमचंद मेहता और गोविंद प्रसाद गीते सहित कई प्रमुख लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उन्हें इंदौर जेल भेज दिया गया।

आपातकाल के दौरान कई लोगों ने यातनाओं व दमन की वजह से दम तोड़ दिया। मध्य प्रदेश में ही थानों और जेल में 106 सेनानी शहीद हुए। अग्रवाल ने बताया कि घर पर छापे के दौरान वे खंडवा में नहीं थे। कुछ दिन बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर खंडवा जेल में रखा गया। तब उनकी उम्र 28 वर्ष थी।

उन दिनों को याद कर आज भी रूह कांप जाती है, शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। सुरेंद्र अग्रवाल वर्ष 2018 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित लोकतंत्र सेनानियों के राष्ट्रीय अधिवेशन में भी लालकृष्ण आडवाणी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में आपातकाल का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की एक लाइब्रेरी में होने का मामला उठा चुके हैं।

तब विदेश मंत्री ने इसके लिए प्रयास करने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि 26 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में होने वाले आयोजन में खंडवा से करीब 150 लोकतंत्र सेनानी और उनके स्वजन शामिल होंगे। इस दौरान लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा ऑस्ट्रेलिया से आपातकाल का रिकॉर्ड भारत लाने की मांग की जाएगी।

Related Articles

Back to top button