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मध्यप्रदेश

नानी की सलाह पर पशु आहार के तैयार किए अत्याधुनिक कारखाने किए तैयार

इंदौर। इंजीनियर करने के बाद जहां युवा मल्टीनेशनल कंपनियों में बड़े पैकेज की ओर रुख करते है। वहीं शहर के होनहार युवा प्रतीक टाेंग्या ने 1998 में अपने खुद के बिजनेस की नई इबारत लिखी। नाना की सलाह पर उन्होंने देश में पशुओं को उच्च क्वालिटी का आहार उपलब्ध करवाने के लिए अत्याधुनिक पशु आहार के कारखाने तैयार करने का काम शुरू किया। इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कई बड़े कारखाने तैयार किए है।

काम के प्रति जुनून व जुझारुपन का ही असर है कि उन्हें इंदौर में बन रही मेट्रो तीन स्टेशन बनाने का जिम्मा मिला है। सितंबर में होने वाले मेट्रो के ट्रायल रन के पहले इनकी कंपनी हिंदुस्तान इक्विपमेंट प्रालि तीन मेट्रो स्टेशन का निर्माण करेगी। अपने पिछले 25 साल की बिजनेस की सफल यात्रा के बारे में बताते हुए प्रतीक कहते है कि एसजीएसआईटीएस में 1998 में बीई मेकिनक से इंजीनियरिंग की और उस समय वे यूनिवर्सिटी में मेकेनिकल इंजीनियर में टापर भी रहे। उस दौरान मेरे नाना श्रीपाल बड़जात्या जिनका पशु आहार खली व कपास्या का व्यापार था।

नानी कमलप्रभा बड़जात्या ने उस समय मुझसे कहा कि तुम दुनिया के आधुनिक कारखाने बनाओ ताकि भारत में गाय व अन्य पशुओं को उच्च क्वालिटी का पशु आहार मिल सके। उनकी सलाह पर मैंने इंदौर में 1998 में हिंदुस्तान इक्विपमेंट प्रालि कंपनी की शुरुआत की। कंपनी के फिलहाल सांवेर व बरदरी के प्लांट में पशु आहार के उपकरण व टर्न की प्रोजेक्ट संबंधित काम करती है। इसकी तकनीक भी हमने खुद ही विकसीत की। हमारी कंपनी ने सांची दूध, (सरस) राजस्थान, (अमूल) गुजरात , (नंदिनी) कर्नाटक की को-आपरेटिव सोसायटी के लिए पशु आहार के कारखाने तैयार किए हैं। इंदौर में कारखानों के उपकरण तैयार किए जाते और उसे उन स्थानों पर असेम्बल किया जाता है।

कोविड के दौरान हमारी कंपनी ने लाकडाउन की स्थिति में करीब नौ माह पालनपुर में अमूल का 2200 टन प्रतिदिन पशु आहार बनाने वाला दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा कारखाना तैयार किया। तीन महीने लाकडाउन के दौरान में पालनपुर में रूका रहा ताकि टीम का हौसला व मनोबल बना रहे। मेरे मित्र संवेद भंडारी ने एक बार मुझे सलाह दी कि तुम्हे इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े प्रोजेक्ट भी करना चाहिए। इसमे बाद मेरी कंपनी ने कंस्ट्रशन बिजनेस व हैवी इंडस्ट्री इंफ्रास्टक्चर क्षेत्र में काम करना शुरू किया।

मित्र के साथ मिलकर मैं अपनी कंपनी के साथ पीथमपुर में सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा इंडस्ट्रीयल टावर तैयार कर रहा हूं। इसका वजन करीब चार हजार टन है और ऊचांई 250 फीट है। वर्तमान में मेरी कंपनी को मेट्रो प्रोजेक्ट में तीन मेट्रो स्टेशन बनाने का जिम्मा भी मिला है। मेरे 25 साल के व्यवसायिक यात्रा में परिवार के अन्य सदस्यों को सहयोग भी मिला। पिता महेशचंद्र टोंग्या का कपड़ा व्यवसाय का बिजनेस है लेकिन वो 75 साल की उम्र में भी मेरे कार्य में सहयोग व मार्गदर्शन करते है।

इसी तरह पत्नी चारु भी बच्चों को स्कूल छोड़ने के बाद फैक्ट्री पर काम करने आती है। वो कंपनी की सीएसआर, लेबर वेलफेयर, मार्केटिंग पालिसी व स्ट्रेटजी को देखती है। आज में जिस मुकाम पर पहुंचा हूं उसमें मेरे साथियों व कर्मचारियों का सहयोग रहा है। वर्ष 2000 में मैं सड़क दुर्घटना में घायल हुआ। उस समय कंपनी के 50 कर्मचारी प्रतिदिन अस्पताल में मुझसे मिलने आते थे और उसके बाद फैक्टरी पर जाते थे। उस दौरान मेरे छह माह तक अस्पताल में रहने पर कंपनी का कार्य सुचारु रुप से चलता रहा।

आज कंपनी में 400 कर्मचारी है और हम उनका और परिवार के सदस्यों का नि:शुल्क उपचार व अन्य सहयोेग करते है। कंपनी में कर्मचारी के निधन पर जीवन पर्यंत व बच्चों के शिक्षा अन्य सहयोग देते है। इसके अलावा मूकबधिर स्कूल को भी सहयोग देते है।

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