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मध्यप्रदेश

आवेदन पुरानी योजना में प्रस्तुत है तो याचिकाकर्ता को उसी के तहत आवंटित की जाए जमीन

 इंदौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने जमीन आवंटन को लेकर प्रस्तुत एक याचिका का निराकरण करते हुए जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता ने पुरानी योजना के प्रविधानों के तहत उस वक्त आवेदन किया था जब पुरानी योजना लागू थी, इसलिए उसके आवेदन का निराकरण उसी के प्रविधानों के तहत किया जाए। कोर्ट ने प्रशासन को याचिकाकर्ता को तीन माह में जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।

याचिकाकर्ता प्रवीण पडियार निवासी झाबुआ ने हाई कोर्ट में झाबुआ जिला कलेक्टर के खिलाफ याचिका प्रस्तुत की थी। उनका कहना था कि वे शारीरिक रुप से नि:शक्त हैं और उन्होंने 20 जून 2016 को शासन की योजना के तहत जमीन आवंटन के लिए एक आवेदन जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया था। इस आवेदन में उन्होंने नि:शक्तजन के लिए शासन द्वारा 3 जुलाई 2006 से लागू योजना का हवाला देते हुए जमीन आवंटन की मांग की थी, लेकिन आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

27 जनवरी 2017 को इस याचिका का निराकरण करते हुए कोर्ट ने आवेदन का निराकरण 45 दिन में करने के आदेश दिए। वर्ष 2020 में शासन ने आवंटन को लेकर नई योजना लागू कर दी। इस पर कलेक्टर ने याचिकाकर्ता का आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि वे नई योजना के तहत दोबारा आवेदन प्रस्तुत करें। इस पर याचिकाकर्ता दोबारा कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने तर्क रखा कि जिस वक्त पुरानी योजना लागू थी उस वक्त आवेदन किया गया था। शासन के जवाब से भी स्पष्ट है कि आवंटन के लिए जमीन उपलब्ध है।

बावजूद इसके उन्हें जमीन आवंटित नहीं की जा रही है। शासन ने कोर्ट में तर्क रखा कि चूंकि पुरानी योजना समाप्त हो चुकी है इसलिए याचिकाकर्ता को नई योजना के प्रविधानों के तहत आवेदन करना होगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन तीन माह में जमीन आवंटित करे।

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