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घूसकांड में फंसे नगर निगम सतना के पूर्व आयुक्त को 5 साल की जेल और 1 लाख का जुर्माना

सतना। डाक्टर से 50 लाख रुपये रिश्वत मांगने और 12 लाख रुपये लेते पकड़े जा चुके सतना के तात्कालिक नगर निगम आयुक्त को न्यायालय ने सजा सुना दी है। लोकायुक्त रीवा में पंजीबद्ध भ्रष्टाचार के प्रकरण में विशेष न्यायालय सतना द्वारा सोमवार को दिए गए निर्णय में आरोपित सुरेंद्र कुमार कथुरिया तत्कालीन आयुक्त नगर पालिक निगम सतना हाल निलंबित संबद्ध कार्यालय संचालक नगरीय विकास विभाग भोपाल को दोषी पाते हुए चार वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है।न्यायालय द्वारा आरोपित का जेल वारंट तैयार कर सेंट्रल जेल सतना भेजा गया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक फकरुद्दीन द्वारा की गई।

भोपाल में नगरीय विकास विभाग में हैं संबद्ध

न्यायालय विशेष न्याययाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) सतना द्वारा आरोपित सुरेन्द्र कुमार कथूरिया पिता सत्यानारायण कथूरिया उम्र 46 वर्ष तत्कालीन नग‍र पालिक आयुक्त सतना को सजा सुनाई गई है। कथूररिया वर्तमान में भोपाल में कार्यालय संचालक नगरीय विकास विभाग में निलंबन अवधि से संबद्ध हैं। वे भोपाल टॉकीज के पास रह रहे हैं। मुख्य रूप से निवासी शक्ती जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ के वे रहने वाले हैं। इनपर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 में 04 वर्ष एवं 50 हजार रुपये रूपये का अर्थदंड एवं धारा 13(1)(डी), 13(2) में 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 50 हजार रुपये कुल एक लाख रुपये अर्थदंड सें दंडित किया गया।

ये था मामला

अभियोजन प्रवक्ता हरिकृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि विगत 20 जून 17 को शिकायतकर्ता डॉक्टर राजकुमार अग्रवाल (सिटी हॉस्पिटल भरहुत नगर) द्वारा सुरेन्द्र कथूरिया आयुक्त नगर पालिक निगम सतना द्वारा 50 लाख रुपये रिश्वत की मांग करने के संबंध में पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत पत्र में यह लेख किया था कि भरहुत नगर स्थित सिटी हॉस्पिटल न गिराने के एवज में आरोपित सुरेन्द्र कुमार कथूरिया उससे 50 लाख रुपये की मांग कर रहा है। उक्त शिकायत पत्र को पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त रीवा द्वारा डीएसपी देवेश पाठक को सत्यापन कार्यवाही के लिए आदेशित किया था। रिश्वत संबंधी गोपनीय बातचीत डिजिटल वाइस रिकार्डर में रिकार्ड होने पर एवं शिकायत सही पाये जाने पर लोकायुक्त टीम रीवा द्वारा ट्रेप कार्रवाई 26 जून 2017 को तत्कालीन उपपुलिस अधीक्षक देवेश पाठक के अगुवाई में आयोजित की गई थी। रिश्वत में देने के लिए डा. राजकुमार अग्रवाल 12 लाख रुपये एवं चांदी के तीन टुकड़े जिस पर सोने का पानी चढा था (गोल्ड प्लेटेड सिल्वर) लोकायुक्त कार्यालय लेकर आया और उस पर केमिकल लगा कर डॉक्टर अग्रवाल को दिया गया। ट्रेप दल सतना पहुंचा और डॉ. अग्रवाल को आरोपित सुरेन्द्र कुमार कथूरिया से मिलने एवं रिश्वत मांगने पर उसे देने उसके शासकीय निवास पर भेजा गया। जहां पर आरोपित ने डॉक्टर अग्रवाल से 12 लाख रुपये नगद एवं चांदी के तीन टुकड़े जिस पर सोने का पानी चढा था (गोल्ड प्लेटेड सिल्वर) जैसे ही रिश्वत में प्राप्त किया वैसे ही ट्रेप दल ने रंगे हाथ आरोपित को उसके शासकीय निवास में ही दबोच लिया।

ट्रेप कार्रवाई के बाद गए थे जेल

ट्रेप कार्रवाई करने के उपरांत आरोपित को गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया था और बाद में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने पर आरोपित जेल से बाहर आया। अग्रिम विवेचना उपपुलिस अधीक्षक वीके पटेल द्वारा की गई। विवेचना के उपरांत आरोपित के विरुद्ध धारा 7, 13(1)(डी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 का आरोप प्रमाणित पाए जाने पर चालान विशेष न्यायाधीश के न्यायालय में वर्ष 2019 में पेश किया गया था। विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा कुल 11 अभियोजन साक्षी को पेश कर साक्ष्य कराए गए एवं लगभग 50 दस्ताेवेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत कर प्रमाणित कराए गए। अभियोजन द्वारा इस प्रकरण में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों, अभियोजन साक्षियों के कथनों एवं लिखित तर्कों से संतुष्ट होते हुए सोमवार को सतना की विशेष न्यायालय ने आरोपित को जेल और जुर्माने की सजा से दं‍डित किया।

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