US Stance on India Internal Matters: भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने से अमेरिका का इनकार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले— यह भारत का अंदरूनी मामला है

भारत में प्रदर्शनों और मानवाधिकारों को लेकर उठे सवालों पर अमेरिका ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह भारत का आंतरिक मामला है, और अमेरिका इसमें किसी भी प्रकार का दखल नहीं देगा, क्योंकि अमेरिका में भी ऐसे प्रदर्शन समय-समय पर होते रहते हैं. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष रैपोर्टेयर्स ने भारत में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद 6 अमेरिकी सांसदों ने मार्को रूबियो से भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा उठाने की मांग की थी.
🇮🇳 भारत का कड़ा जवाब: मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं होना चाहिए
संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष रैपोर्टेयर्स की टिप्पणियों पर भारत ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है. भारत की ओर से दोटूक कहा गया है कि मानवाधिकारों के संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल कभी भी राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. भारत ने बिना तथ्यों की पूरी जाँच किए निराधार आरोपों के आधार पर देश की अंतरराष्ट्रीय छवि खराब करने के प्रयासों पर भी कड़ा एतराज जताया है. भारत का मानना है कि मानवाधिकारों से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा हमेशा वास्तविक तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि किसी देश को टार्गेट करके.
🤝 मार्को रूबियो का तीन दिन का भारत दौरा: व्यापार समझौते पर 99 फीसदी काम पूरा, ऊर्जा और सुरक्षा पर चर्चा
अपने तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 20 अक्टूबर को मुंबई पहुँचे. इस दौरान उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्चस्तरीय मुलाकात की. इस दौरे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते, ऊर्जा सहयोग और रक्षा-सुरक्षा से जुड़े तमाम अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है. इसके अलावा, रूबियो के गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी का दौरा करने का भी कार्यक्रम तय है. अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने और वेनेजुएला से कच्चे तेल की प्रोसेसिंग से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर भी विचार कर रहा है.
🏛️ अमेरिकी सांसदों की मांग को किया दरकिनार, टैरिफ और वीजा नीति पर भी रखी अपनी बात
भारत आने से पहले छह अमेरिकी सांसदों—प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया—ने मार्को रूबियो से मुलाकात कर उनसे भारत सरकार के साथ बातचीत में मानवाधिकारों का मुद्दा उठाने की अपील की थी. हालांकि, मार्को रूबियो ने अमेरिकी सांसदों की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया. अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बात करते हुए बताया कि समझौते पर लगभग 99 फीसदी काम पूरा हो चुका है, और इसे अंतिम रूप देने के लिए केवल कुछ ही बचे हुए बिंदुओं पर सहमति बनना बाकी है. साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका की टैरिफ और वीजा से जुड़ी नीतियां किसी भी तरह से भारत को विशेष रूप से निशाना बनाकर नहीं बनाई गई हैं.





