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नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ मुस्लिम लीग ने दाखिल की पहली याचिका, SC में दी चुनौती

नई दिल्ली: संसद ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताडऩा के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। राज्यसभा ने विस्तृत चर्चा के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया। दोनों सदनों से पास हो जाने के बाद नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दाखिल हो गई। ये याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि संविधान धर्म के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता। साथ ही आईयूएमएल ने इस पर तुरंत रोक लगाने की भी मांग की है। कांग्रेस के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल इस मामले को लेकर कोर्ट में आईयूएमएल की पैरवी कर सकते हैं।

नागरिकता संशोधन विधेयक को मिली संसद से मंजूरी
इससे पहले नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया है। विधेयक के पक्ष में 125 मत पड़े जबकि 105 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के मुसलमान भारतीय नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी में खासी कमी आयी है। शाह ने कहा कि विधेयक में उत्पीडऩ का शिकार हुए अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। शाह ने इस विधेयक के मकसदों को लेकर वोट बैंक की राजनीति के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए देश को आश्वस्त किया कि यह प्रस्तावित कानून बंगाल सहित पूरे देश में लागू होगा। उन्होंने इस विधेयक के संविधान विरूद्ध होने के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संसद को इस प्रकार का कानून बनाने का अधिकार स्वयं संविधान में दिया गया है।

दिल्ली में रह रहे पाकिस्तानी हिंदुओं ने कहा अब हम पक्षी की तरह उड़ सकेंगे 
वहीं राज्यसभा से नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित होते ही दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में वर्षों से रहे पाकिस्तानी हिंदुओं की बस्ती में उत्सव का माहौल हो गया। उन्होंने अपनी खुशी का इजहार पटाखें जलाकर, सीटी और ताली बजाकर किया। बच्चों ने अपनी खुशी तिरंगे के साथ पटाखे जलाकर प्रकट की और भारत माता की जय और जय हिंद के नारे लगाए। वहीं, बड़े बुजुर्गों ने एक दूसरे को बधाई दी और मिठाइयां बांटी। यहां रहने वाले एक परिवार ने संसद से विधेयक पारित होने के बाद अपनी बेटी का नाम नागरिकता रखा। बेटी की दादी मीरा दास ने कहा कि बच्ची का जन्म सोमवार को हुआ था और परिवार ने उसका नाम नागरिकता रखने का फैसला किया जो राज्यसभा से अब पारित हो चुका है। मीरा ने भी लोकसभा में विधेयक के पारित होने की मन्नत मांगी थी और उस दिन उपवास रखा था। उन्होंने कहा, सुरक्षित पनाहगाह की तलाश में हम आठ साल पहले भारत आए थे। यह हमारा एकमात्र घर है लेकिन नागरिकता नहीं मिलने की वजह से हम दुखी थे। अब गर्व से कह सकते हैं कि हम भारतीय हैं और हम पक्षी की तरह उड़ सकते हैं।

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