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मध्यप्रदेश

क्या प्राइवेट पुलिस से वसूली करवा रहे अफसर

कुछ साल पूर्व भोपाल पुलिस ने हत्या के मुलजिम को गिरफ्तार किया तो पता चला वह लसूड़िया थाने के तत्कालीन टीआइ की न सिर्फ गाड़ी चला रहा था बल्कि अवैध वसूली का हिसाब-किताब भी उसके जिम्मे कर रखा था। पुलिस मुख्यालय से पत्राचार होने पर आइजी-एसपी ने आनन-फानन में थानों की गाड़ी चलाने वालों का सत्यापन करवाया और निजी चालकों की छुट्टी कर दी। जैसे ही आयुक्त प्रणाली लागू हुई प्राइवेट पुलिस का दौर भी लौट आया। यह खुलासा हाल ही में लसूड़िया थाने में दर्ज एफआइआर से हुआ। जांच जोन-2 के डीसीपी अभिषेक आनंद द्वारा करवाई गई है। मूलत: शिवपुरी का रहने वाला अजय शर्मा विजय नगर-लसूड़िया में न सिर्फ अवैध वसूली करता था, बल्कि थाने में भी ठप्पे से बैठा रहता था।

एक दिन का एएसपी बनवा दो सरकार

उप पुलिस अधीक्षक से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बने अफसरों का एक-एक दिन भारी गुजर रहा है। दो पदोन्नति के ढाई महीने बाद भी सरकार ने सूची जारी नहीं की है। राज्य शासन ने ढाई महीने पूर्व 34 उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) को पदोन्नति दी थी। खींचतान के कारण आज तक आदेश ही जारी नहीं हो पाए। दो अफसर डीएसपी पद से ही सेवानिवृत होकर घर चले गए। एसीपी बीपीएस परिहार का इसी महीने रिटायरमेंट है। लेकिन सरकार के रवैये से अफसर नाराज हैं। उनकी नाराजगी सूची नहीं बल्कि पदोन्नति न करना है। उनका स्पष्ट कहना है कि आइपीएस प्रमोट होने के बाद अपना पद नाम बदल लेते हैं। फिर हमारे साथ ऐसा अन्याय क्यों। सरकार भले ही तबादला आदेश जारी न करें पर एएसपी का तमगा तो लगा ही सकती है।

जिला बदलते ही धुल गए अफसरों के दाग

शहर और ग्रामीण से जिन निरीक्षकों को लापरवाही के कारण हटाया उन्हें पसंदीदा जिला मिल गया। जिला बदलते ही उन पर लगे दाग भी धुल गए। निरीक्षकों के विरुद्ध जांच कर रहे अफसर भी ताकते रह गए। पुलिस मुख्यालय ने चुनाव की जद में आ रहे 673 निरीक्षकों का तबादला किया है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र के 92 निरीक्षक प्रभावित हुए हैं। इनमें निरीक्षक संजयसिंह बैस, धर्मेंद्र शिवहरे, आरएनएस भदौरिया भी शामिल हैं। बैस को बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज मामले में हटाया था। स्पेशल टास्क फोर्स के एडीजी विपिन माहेश्वरी इसकी जांच कर रहे हैं। उन्हें धार भेजा गया है। बैस ने खुद धार की मांग की थी। शिवहरे और भदौरिया को प्रोफेसर विमुक्ता शर्मा हत्याकांड में हटाया गया था। दोनों को नया जिला मिल गया है।

पहली पोस्टिंग में जिलों के कप्तान बनेंगे आइपीएस

राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नत हुए अफसरों की पोस्टिंग का इंतजार खत्म होने वाला है। भाजपा नेता और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तरफ से मिले फीडबैक में तीन अफसरों को पहली बार में जिले की कमान सौंपी जा सकती है। 3 जुलाई को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के 14 अफसरों को आइपीएस अवार्ड आवंटित हुआ था। खरगोन एएसपी रहे मनीष खत्री को अवार्ड के पहले भिंड एसपी बना दिया, जबकि शेष आइपीएस बनने के बाद भी अफसर एएसपी के रूप में कार्य कर रहे हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए सरकार ने उनका फीडबैक मांगा है। बताते हैं जोन-2 के एडीसीपी राजेश व्यास और धार एएसपी देवेंद्र पाटीदार के लिए संघ और स्थानीय नेताओं ने वकालात की है। फायर एसपी पद्मविलोचन शुक्ल के लिए भी सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज नेताओं ने मंजूरी दे दी है।

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