MP UCC Draft: मध्य प्रदेश में 10 दिन में तैयार होगा समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट; जानें आदिवासियों पर क्या पड़ेगा असर?

भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। राज्य के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के अनुसार, अगले 10 दिनों में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा। इस ड्राफ्ट में आदिवासियों की विशिष्ट परंपराओं को संरक्षित रखने और उनके अधिकारों को यूसीसी के दायरे में लाने के बीच संतुलन बनाने पर विशेष चर्चा की जा रही है।
⚖️ आदिवासी अधिकारों और अंतरजातीय विवाह पर मंथन
समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं को संविधान के विशेष प्रावधानों के तहत सुरक्षा मिली हुई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों के संपत्ति अधिकारों को यूसीसी के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। यदि कोई आदिवासी महिला या पुरुष गैर-आदिवासी समुदाय में विवाह करता है, तो उनके ‘आदिवासी अधिकारों’ और ‘पारंपरिक फैमिली लॉ’ के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए नियमों को परिभाषित किया जा रहा है।
📋 अनिवार्य विवाह पंजीकरण और संपत्ति के नियम
यूसीसी के तहत बहु-विवाह पर रोक और विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। आदिवासियों के लिए विवाह पंजीकरण का विकल्प स्वैच्छिक रखने पर भी चर्चा जारी है। साथ ही, वसीयत न होने की स्थिति में संपत्ति के बंटवारे में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार देने जैसे प्रावधानों पर भी समिति गौर कर रही है, जो उत्तराखंड और गुजरात के यूसीसी मॉडल से प्रेरित हो सकते हैं।
🔮 क्या हैं गुजरात और उत्तराखंड के मुख्य प्रावधान?
राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने की तैयारी में है। अन्य राज्यों के मॉडलों से प्रेरणा लेते हुए:
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लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन में रहना अब बिना पंजीकरण के कठिन होगा। पंजीकरण न कराने पर 3 माह की कैद या जुर्माने का प्रावधान हो सकता है।
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बच्चों के अधिकार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें माता-पिता का नाम व संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।
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संपत्ति का अधिकार: पति-पत्नी की मृत्यु के बाद बच्चों (पुत्र और पुत्री) का समान उत्तराधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।






