ब्रेकिंग
HCL मलाजखंड और आईआईटी कानपुर की SATHEE पहल ने मलाजखंड में आयोजित किया करियर काउंसलिंग एवं जागरूकता स... गाजियाबाद में निषाद पार्टी का कार्यक्रम, काफी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल कवर्धा में फर्जी डिजिटल पेमेंट का भंडाफोड़: फर्जी रिसीविंग दिखाकर नकद राशि ऐंठने वाले गिरोह पर एक्शन Bhilai News: भिलाई सेक्टर-2 में गटर की सफाई के दौरान मिला नवजात का शव, इलाके में सनसनी; जांच में जुट... Barwani News: बिजासन घाट में शिमला मिर्च से भरे मिनी ट्रक में लगी भीषण आग, कूदकर बची ड्राइवर की जान;... लाठीचार्ज के बाद भड़के डॉक्टर्स, सीनियर रेजिडेंट्स ने किया OPD का बहिष्कार; JDA का समर्थन MP High Court on Dacoity Act: जब प्रदेश में डकैत ही नहीं तो 45 साल पुराना एक्ट क्यों? हाईकोर्ट ने DG... भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर: कमला पार्क में धरना जारी, मिला कांग्रेस का... रतलाम में मॉडिफाइड साइलेंसरों पर गरजा पुलिस का बुलडोजर: 108 साइलेंसर कुचले, ₹1 लाख का जुर्माना वसूला Gwalior Achaleshwar Mandir: अचलेश्वर महादेव मंदिर की दानपेटी से निकली अनोखी चिट्ठियां, भक्त बोला- 'क...
मध्यप्रदेश

MP UCC Draft: मध्य प्रदेश में 10 दिन में तैयार होगा समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट; जानें आदिवासियों पर क्या पड़ेगा असर?

भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। राज्य के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के अनुसार, अगले 10 दिनों में यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा। इस ड्राफ्ट में आदिवासियों की विशिष्ट परंपराओं को संरक्षित रखने और उनके अधिकारों को यूसीसी के दायरे में लाने के बीच संतुलन बनाने पर विशेष चर्चा की जा रही है।

⚖️ आदिवासी अधिकारों और अंतरजातीय विवाह पर मंथन

समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने स्पष्ट किया कि आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं को संविधान के विशेष प्रावधानों के तहत सुरक्षा मिली हुई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों के संपत्ति अधिकारों को यूसीसी के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। यदि कोई आदिवासी महिला या पुरुष गैर-आदिवासी समुदाय में विवाह करता है, तो उनके ‘आदिवासी अधिकारों’ और ‘पारंपरिक फैमिली लॉ’ के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए नियमों को परिभाषित किया जा रहा है।

📋 अनिवार्य विवाह पंजीकरण और संपत्ति के नियम

यूसीसी के तहत बहु-विवाह पर रोक और विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। आदिवासियों के लिए विवाह पंजीकरण का विकल्प स्वैच्छिक रखने पर भी चर्चा जारी है। साथ ही, वसीयत न होने की स्थिति में संपत्ति के बंटवारे में पुत्र और पुत्री को समान अधिकार देने जैसे प्रावधानों पर भी समिति गौर कर रही है, जो उत्तराखंड और गुजरात के यूसीसी मॉडल से प्रेरित हो सकते हैं।

🔮 क्या हैं गुजरात और उत्तराखंड के मुख्य प्रावधान?

राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने की तैयारी में है। अन्य राज्यों के मॉडलों से प्रेरणा लेते हुए:

  • लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन में रहना अब बिना पंजीकरण के कठिन होगा। पंजीकरण न कराने पर 3 माह की कैद या जुर्माने का प्रावधान हो सकता है।

  • बच्चों के अधिकार: लिव-इन में जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें माता-पिता का नाम व संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा।

  • संपत्ति का अधिकार: पति-पत्नी की मृत्यु के बाद बच्चों (पुत्र और पुत्री) का समान उत्तराधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।

Related Articles

Back to top button