ब्रेकिंग
नाम के आगे 'शंकराचार्य' कैसे लगाया? मेला प्रशासन के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का करारा जवाब,... सुखबीर बादल का CM मान पर बड़ा हमला: बोले- मुख्यमंत्री में लोगों का सामना करने की हिम्मत नहीं, वादों ... कातिल चाइना डोर का कहर! युवक के चेहरे और नाक पर आए दर्जनों टांके, मौत के मुंह से बचकर लौटा पीड़ित Jalandhar Crime: रिटायर्ड कर्नल के साथ धोखाधड़ी, 9 लोगों पर FIR दर्ज; जानें जालंधर में ठगी का पूरा म... भगवंत मान सरकार के रोजगार के दावे फेल! पंजाब में फैला फर्जी ट्रैवल एजेंटों का मकड़जाल, विदेश भेजने क... Drug Smuggling Case: पुलिस की बड़ी कार्रवाई, करोड़ों रुपये की हेरोइन बरामद; 2 तस्करों को रंगे हाथों ... शिक्षा क्रांति के दावों की खुली पोल! सरकारी स्कूलों में लेक्चरर्स का टोटा, बिना एक्सपर्ट्स के कैसे प... Ludhiana Weather: कोहरे की सफेद चादर में लिपटा लुधियाना, 22 और 23 जनवरी को आंधी-बारिश का डबल अटैक; म... आयुष्मान कार्ड धारकों को बड़ा झटका! 45 निजी अस्पताल योजना के पैनल से बाहर, इलाज के लिए दर-दर भटकने क... Haryana Agniveer Quota: हरियाणा में अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! इस सरकारी भर्ती में मिलेगी प्राथ...
देश

बाढ़ से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए 50 से ज्यादा मकान शुद्ध पेयजल के लिए भटक रहे ग्रामीण

बुरहानपुर  गांव की निचली बस्तियों की सड़कों पर डेढ़ से 2 फीट जमी कीचड़ की परत, बाढ़ से पूरी तरह नष्ट हुए कच्चे-पक्के मकान, भोजन और शुद्ध पेयजल के लिए भटकते ग्रामीण, तबाही का मंजर बुरहानपुर जिले की फोकटपुरा बस्ती का है। इस गांव में शनिवार रात उफान पर आई मोहना नदी का पानी घुस गया था।

गांव के लोगों ने आपबीती बताते हुए नई दुनिया टीम से कहा कि जलजला ऐसा था कि बस खुद की और बच्चों की जान ही बचा सके। समय रहते अगर घर छोड़कर दूसरे इलाके में नहीं गए होते तो बाढ़ में जिंदगी खो देना तय था। करीब 7 हजार की आबादी वाले इस गांव के 50 से ज्यादा नदी किनारे के कच्चे पक्के मकान पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। डेढ़ सौ से ज्यादा मकानों में पानी घुसने के कारण गृहस्थी का सारा सामान बर्बाद हो चुका है।

जिला प्रशासन के निर्देश पर पंचायत ने ग्रामीणों के भोजन और रहने की व्यवस्था की है, लेकिन रविवार सुबह से यह ग्रामीण शुद्ध पेयजल के लिए भटकते मिले। प्रशासन ने कुछ टैंकर जरूर लगाए थे, लेकिन ये आबादी के हिसाब से बहुत कम थे। जब भी कोई टैंकर पहुंचता था तो ग्रामीणों की लंबी कतार लग जाती थी। नई दुनिया टीम ने रविवार सुबह इस बस्ती की ग्राउंड रिपोर्ट की, जिसमें पता चला कि प्रशासनिक दावों के विपरीत गांव में वैसी राहत और सहायता अभी नहीं पहुंच पाई है जैसे मिलने चाहिए थी।

महिलाओं को बांटे गए कपड़े

सुबह 9:00 बजे के आसपास एसडीएम पल्लवी पुराणिक और सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के प्रतिनिधि गजेंद्र पाटिल गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि जल्द ही सर्वे कर उन्हें राहत राशि दिलाई जाएगी। तात्कालिक सहायता के रूप में कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर प्रभावित परिवारों की महिलाओं को कपड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

50 साल में पहली बार गांव में घुसा पानी

ग्रामीणों का आरोप है कि 5 साल पहले गांव के पास मोहना नदी में एक डैम बनाया गया था, जो खराब गुणवत्ता के कारण फूट गया है। जिसके चलते 50 साल में पहली बार मोहना नदी ने अपनी सीमाएं लांग कर गांव में प्रवेश किया है।

Related Articles

Back to top button