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ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी में एनएसयूआइ नेताओं ने दीवारों पर लिखा भ्रष्ट कुलपति कार्यालय

ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों की संबद्धता में हुए भ्रष्टाचार के चलते मंगलवार को एक बार फिर जेयू में जमकर हंगामा हुआ, बात इतनी बढ़ गई की जेयू के प्रशासनिक भवन में दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘भ्रष्ट कुलपति कार्यालय’ लिख दिया गया। बता दें कि एनएसयूआइ के छात्र नेता वंश महेश्वरी संबद्धता प्रक्रिया से जुड़े कुछ सवालों का जवाब लेने के लिए अपने कुछ साथियों के साथ जेयू के कुलपति प्रो. अविनाश तिवारी के चैंबर में जा पहुंचे।

सवालों के घेरे में दस्तावेज

वंश बताते हैं कि उन्होंने कुलपति से जेयू के लिखित नियमों का हवाला देते हुए कहा कि कालेजों को सशर्त संबद्धता देने का कोई प्रविधान नहीं है फिर कैसे आपने कालेजों को सशर्त संबद्धता दे दी। अंचल के सभी कालेजों के दस्तावेज मांगे थे, 400 में से सिर्फ 65 कालेजों ने दस्तावेज दिए हैं वह भी सवालों के घेरे में हैं, आपके दस्तावेज न देने वाले कालेजों की संबद्धता खत्म करने की कार्रवाई शुरू क्यों नहीं की।

कुलपति से कोई संतुष्टिजनक जवाब न मिलने पर वंश बोला कि ‘आप ऐसे कालेजों को संबद्धता बांट कर छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।’ इस पर दोनों में बहस शुरू हो गई और कुलपति ने झल्लाकर कहा कि हम ऐसे संबद्धता खत्म नहीं करेंगे, इसकी बात इसी बैठक में होगी, जाओ आपको जो करना है, कर लो।

कालेजों पर आखिर कब तक मेहरबान रहेगा जेयू

कालेजों पर आखिर कब तक मेहरबान रहेगा जेयू 13 मई को हुई कार्यपरिषद की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया था कि अंचलभर के जिन कालेजों के संचालक वहां नियुक्त प्राचार्य और शिक्षकों के आधार कार्ड और तीन महीने के बैक अकाउंट की जानकारी 31 जुलाई तक जेयू को सौंप देंगे उनकी ही संबद्धता को जारी रखा जाएगा, अन्य के खिलाफ बिना देरी के नियमानुसार कार्रवाई होगी, लेकिन समयसीमा बीत जाने पर भी अब ईसी मेम्बर और कुलपति जानकारी न देने वाले कालेजों को साफ तौर पर बचाने में लगे हैं। न तो कोई दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है और न संबद्धता निरस्त हो रही है। शायद फिर से समय बढ़ाने के लिए अब मामला फिर से ईसी की बैठक में ले जाने की तैयारी चल रही है।

पर्चे चिपकाने से रोका तो हो गई हाथापाई

हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद कुलपति प्रो.अविनाश तिवारी की बात से गुस्साए छात्र नेताओं ने प्रशासनिक भवन की दीवारों पर भ्रष्ट कुलपति कार्यालय लिखना शुरू कर दिया। यहां तक कि कुलसचिव, सहायक कुलसचिव और उप-कुलसचिव के कक्ष के बाहर भ्रष्ट कुलपति कार्यालय क्रमांक 1, 2, 3,4,5 छपे हुए पर्चे भी चिपका दिए। जब चीफ सुरक्षा प्रहरी राजवीर सेंगर ने इन्हें ऐसा करने से रोका तो छात्र नेता भड़क गए और उनके बीच हाथापाई भी हो गई, जिसमें वंश चोटिल भी हुए। अन्य सुरक्षाकर्मी इसका बीच बचाव करने आए, तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।

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