प्रदेश में एक हजार से ज्यादा योजनाएं ई-गवर्नेंस के माध्मम से संचालित हो रही- मंत्री सकलेचा

इंदौर। वर्तमान में डिजिटल टेक्नोलाजी और ई-गवर्नेंस के कारण ही उद्योग, शासन, युवाओं के मार्गदर्शन, ग्रामीण सुविधा, आधारभूत संरचना के उपयोग, दुनिया में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी आसानी से मिल पा रही है। किसी जमाने में लोग सोचते थे कि ग्रामीण क्षेत्र में ई-गवर्नेंस को लागू करना संभव नहीं है। अब गांव के लोग तकनीक का उपयोग कर उसका फायदा ले रहे है। मध्य प्रदेश में एक हजार से ज्यादा योजनाएं ई-गवर्नेंस व तकनीक के माध्मय से संचालित हो रही हैं।
ये बातें प्रदेश के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ने गुरुवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 26वीं राष्ट्रीय ई-गर्वनेंस कांफ्रेंस में कही। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने तकनीक के माध्यम से बिना किसी शिकायत के 60 दिन में डेढ़ करोड़ महिलाओं के खाते में एक हजार रुपये की राशि पहुंचाई। एक समय था जब विधानसभा के सवालों के जवाब एकत्र करने में महीनों लग जाते थे और 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रश्नों के जवाब में बताया जाता था कि जानकारी एकत्र की जा रही है। अब उस शब्द के स्थान पर डेटा के बंच एकत्र हो जाते हैं।
स्वास्थ्य उपचार खर्च में भी आई कमी
सकलेचा ने कहा कि डिजिटल क्रांति के कारण ही लोगों के स्वास्थ्य का डेटा अब आभा आइडी के माध्यम से आनलाइन उपलब्ध हो रहा है। टेली मेडिसिन व आभा आइडी जैसे प्रयोगों से यह हुआ संभव है कि स्वास्थ्य सेवाओं में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य उपचार खर्च की दरों में भी कमी आएगी।
भारत दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था
मंत्री सकलेचा ने बताया कि आज तकनीक के कारण ही ग्रामीण क्षेत्रों में 9600 को आनलाइन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण हम दे पा रहे हैं। भारत दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है, इसमें ई-गवर्नेंस व तकनीक का अहम रोल होगा। कार्यक्रम में मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई और राज्य इलेक्ट्रिक विकास निगम के अध्यक्ष शैतान सिंह पाल उपस्थित थे।
छतरपुर में बना देश का पहला ब्लाक गुड गवर्नेंस इंडेक्स
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कांफ्रेंस के पहले दिन कार्यक्रम में 250 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्य्रक्रम में ‘एडवांसिंग विथ जियोस्पेटिक टेक्नोलाजी: मैपिंग द फ्यूचर मप्र’ काफी टेबल पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसके अलावा छतरपुर कलेक्टर द्वारा पहली बार ब्लाक गुड गवर्नेस इंडेक्स बनाने और इसकी पत्रिका का भी विमोच किया गया गया। इसके अलावा छतरपुर जिले के गुड गवर्नेंस इंडेक्स के डैशबोर्ड का लोकार्पण हुआ।
जितने ज्यादा डिजिटल एप्लीकेशन होंगे, उतना ज्यादा बढ़ेगा आधार का उपयोग
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पूर्व सीईओ रामसेवक शर्मा कार्यक्रम में कहा कि आधार एक डिजिटल पहचान है, यह बिना किसी योग्यता के आपकी पहचान को बताता है। जितने ज्यादा डिजिटल एप्लीकेशन विकसित होंगे, उतना ज्यादा आधार का उपयोग होगा। आधार एक नंबर है, यह कोई कार्ड नहीं है। कई लोग कहते हैं कि आधार से जालसाजी हो गई। आधार के पत्र पर स्पष्ट लिखा है। आधार एक पहचान पत्र है, यह किसी की नागरिकता नहीं। आपको अपनी पहचान आनलाइल प्रमाणीकरण के माध्यम से देना होगी।
आधार के कारण खत्म हुए फर्जी राशन कार्ड
शर्मा ने बताया कि दुर्भाग्य से आधार की ज्यादा बदनामी की गई। जनता को दिए जाने वाले राशन वाले सिस्टम में जब आधार लागू हुआ तो जितने फर्जी राशन कार्ड थे, खत्म हो गए। इसके कारण पोर्टेब्लिटी का फायदा मिला और किसी बिहार का आदमी दिल्ली में रहकर भी अपने आधार के माध्यम से राशन प्राप्त कर सकता है। जो लोग गोल्ड लोन देते हैं, उन्हें आधार को लागू करना चाहिए। इससे चोरी का सोना बेचने वालों पर रोक लगेगी। पासपोर्ट बनाने के लिए अलग बायोमेट्रिक लिया जाता है, जबकि आधार के माध्यम से व्यक्ति का पहचान प्रमाणीकरण किया चाहिए। आयुष्मान भारत के डिजिटल मिशन को डेढ़ से दो साल हुआ है। यह धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जल्द ही बेहतर होगा। इसकी खामियों में भी सुधार होगा।
तकनीक के कारण इन बदलावों से हुई सहूलियत
- – आइआइटी मद्रास व आइआइटी बाम्बे द्वारा भाषिणी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया है, जिसका अलग-अलग भाषाओं, यहां तक क्षेत्रीय भाषाओं को बोलने वाले लोग भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में किसी भाषा के अनुवाद की समस्या खत्म हो जाएगी।
- – यदि आपका पैनकार्ड आधार से लिंक है तो आप ई-हस्ताक्षर के माध्यम से खुद ही अपना रिटर्न जमा कर सकते हैं। ऐसे में आपके रिटर्न के दस्तावेज बेंगलुरु भेजे जाने की भी जरूरत नहीं होगी। यह ई-हस्ताक्षर की शक्ति है।
- – छह बिलियन दस्तावेज डिजिटल लाकर में जमा हैं। ऐसे में लोगों को अपने पास कागज के दस्तावेज रखने की जरूरत नहीं।
- – डिजिटल क्रांति के कारण ही पकौड़े का ठेला लगाने वाले को यदि दो हजार रुपये का लोन चाहिए तो उसे भी आसानी से लोन के रूप में यह राशि मिल रही है।