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वक्री हुए बृहस्पति… मौसम में परिवर्तन दिखाई देगा, बारिश फिर से शुरू होगी

उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। पंचांग की गणना के अनुसार तीन सितंबर की रात आठ बजकर 22 मिनट से देवगुरु बृहस्पति वक्री हो गए हैं। गुरु के वक्र होते ही पूर्वोत्तर दिशा में और दक्षिण के विशेष भूभाग में मौसम का परिवर्तन दिखाई देगा। यही नहीं अलग-अलग क्षेत्र में विशेषकर बैंकिंग, कृषि, विदेश नीति, आदि क्षेत्रों में विशिष्ट प्रकार का सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। जिन जातकों के कार्य बिगड़ रहे हैं, उनके कार्य में सकारात्मक परिणाम की प्राप्ति होने का भी अवसर मिलेगा। बता दें वर्तमान में गुरु राहु के साथ मेष राशि में गोचरस्थ है।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया नवग्रह में गुरु का वक्रत्व काल और मार्गी होने का समय अलग-अलग प्रकार से बनता रहता है। इस बार गुरु का वक्रत्व काल तीन सितंबर से 31 दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान अलग-अलग प्रकार की परिस्थितियों निर्मित होंगी जो प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक दृष्टिकोण से दिखाई देगी। समय-समय पर इसके प्रभाव सामने आएंगे, चार माह के वक्रत्व काल में आर्थिक नीति पर विशेष चिंतन होगा। बैंकिंग सेक्टर विशेष नीति के तहत ग्रोथ करेगी।

जी-20 के शिखर सम्मेलन में भारत को विशेष लाभ

ग्रहों के वक्र- मार्गी होने के अलग-अलग प्रकार के फायदे और नुकसान होते हैं किंतु इस बार बृहस्पति के वक्री होने से अलग प्रकार का लाभ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत की स्थिति मजबूत रहेगी। विशिष्ट कूटनीति और रणनीति के तहत वैश्वीकरण की ध्रुवीय नीति पर भारत का पक्ष प्रबल होता दिख रहा है।

कहीं अति वृष्टि, कहीं अल्प वृष्टि के योग बनेंगे

गुरु के वक्री होते ही मौसम में आकस्मिक परिवर्तन होंगे। कहीं अल्प वर्षा और कहीं अतिवृष्टि के योग बनेंगे। विशेष दिशा गणना अनुक्रम देखें तो पूर्वोत्तर दिशा तथा दक्षिण भूभाग में इसका प्रभाव अधिक दिखाई देगा। यह प्रभाव भारत सहित अन्य राष्ट्रों में भी अलग-अलग प्रकार से प्राकृतिक प्रकोप के रूप में दिखाई दे सकता है। कृषि तथा बाजार में भी दिखेगा असरग्रहों के वक्री होने का प्रभाव बैंक, अर्थनीति, कृषि तथा बाजार के अन्य उपक्रमों में भी दिखाई देता है।

बृहस्पति के वक्री होने से बैंक की नीतियों में परिवर्तन होगा। वहीं इंश्योरेंस पॉलिसी के सेक्टर में भी दीर्घकालिक निवेश के संदर्भों का चिंतन होने से अलग प्रकार की नीति का समायोजन होगा। साथ ही बाजार की परंपरागत नीति में भी आधुनिकता का परिवेश दिखाई देगा जिससे परिवर्तित स्थितियां सामने आएंगी।

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