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सिद्धू के अलावा 2 अन्य मंत्रियों को भी कैप्टन मानते है मिशन 13 में हार का कारण

लुधियाना: लोकसभा चुनाव में ‘मिशन 13’ पूरा न होने पर कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने भले ही नवजोत सिंह सिद्धू पर ठीकरा फोड़ते हुए उनका विभाग बदलने की सिफारिश कर दी है, परंतु अंदरखाते की बात की जाए तो कैप्टन सिद्धू के अलावा 2 अन्य मंत्रियों को भी पंजाब में कांग्रेस की हार का जिम्मेदार मानते हुए उन पर कार्रवाई करना चाहते हैं।

चुनावों से पहले मंत्रियों और विधायकों को दी गई चेतावनी

गौर रहे कि लोकसभा चुनावों का ऐलान होने से पहले ही कैप्टन सहित कांग्रेस के अन्य बड़े नेताओं ने पंजाब की सभी 13 सीटों पर जीत हासिल करने का दावा किया था। इस दावे को पूरा करने के लिए मंत्रियों को उनके जिले से संबंधित सीट पर हार होने की सूरत में छुट्टी होने का डर दिखाते हुए विधायकों को अगली बार टिकट पर खतरा होने की चेतावनी भी दी गई थी।  इसके बावजूद कांग्रेस को 5 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इसमें गुरदासपुर सीट से पंजाब प्रधान सुनील जाखड़ का नाम भी शामिल था।

कैप्टन ने सिद्धू के सिर फोड़ा था हार का जिम्मा

हालांकि कैप्टन ने पंजाब में कांग्रेस का सुपड़ा साफ होने की सूरत में इस्तीफा देने की बात कही थी, लेकिन 8 सीटों पर जीत का श्रेय अपने खाते हुए डालते हुए उन्होंने 5 सीटों पर हार का ठीकरा सिद्धू के सिर फोड़ दिया। इसके लिए सिद्धू की तरफ से बठिंडा में दिए गए ‘अकालियों के साथ फ्रैंडली मैच’ वाले बयान को आधार बनाया गया।  शहरों में बेहतर नतीजे न आने के लिए बेहतर कारगुजारी न दिखाने के चलते कैप्टन ने सिद्धू का विभाग बदलने की बात तक कह दी। इसका कई मंत्रियों व कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी समर्थन किया लेकिन इस संबंध में हाईकमान की मोहर लगवाने के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में राहुल गांधी की तरफ से इस्तीफा देने का ऐलान करने की वजह से कोई फैसला नहीं हो पाया और बाद में भी 2 दिन तक कैप्टन को इस बारे राहुल से मिलने के लिए समय नहीं मिला। 

रिपोर्ट में 2 अन्य मंत्रियों के नाम भी शामिल

कैप्टन की रिपोर्ट पर जब भी दिल्ली में कोई फैसला होगा, उसमें सिद्धू के अलावा 2 अन्य मंत्रियों का नाम भी शामिल हो सकता है, जिनमें उनके द्वारा जिद्द करके टिकट दिलवाने के बावजूद संगरूर सीट से केवल ढिल्लों की हुई हार व पटियाला से उम्मीदवार परनीत कौर को चुनाव के दौरान नाभा में आई दिक्कतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

कैप्टन व सिद्धू को है हाईकमान के रुख का इंतजार

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सिद्धू कई दिन तक गायब रहे और ट्विटर पर शेयर-ओ-शायरी के जरिए ही अपनी बात रखते रहे। पर 2 दिन पहले एकाएक चंडीगढ़ पहुंचकर उन्होंने अपना आफिस संभालते हुए लोकल बॉडीज की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने बठिंडा में दिए अपने बयान पर सफाई देते हुए कैप्टन के फैसले पर यह कहकर सवाल खड़े करने की कोशिश की कि क्या जिन सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई, उनमें शहर नहीं आते। वहां भी उनके विभाग के जरिए विकास हुआ है। सिद्धू उसी दिन कैप्टन की तरफ से बुलाई गई मंत्रियों व विधायकों की मीटिंग में नहीं गए।  माना जा रहा है कि कैप्टन व सिद्धू दोनों ही हाईकमान के रुख का इंतजार कर रहें हैं।

घुबाया के आरोपों के बावजूद चुप्पी क्यों?

फिरोजपुर सीट से चुनाव लड़ने वाले शेर सिंह घुबाया का अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही कई नेताओं द्वारा विरोध किया गया था। अब चुनाव हारने के बाद घुबाया की तरफ से हार के लिए जिम्मेदार नेताओं के बारे में राहुल गांधी को चिट्ठी लिखने की बात सामने आई है। इस संबंधी मीडिया से बात करते हुए घुबाया साफ कह चुके हैं कि उनके बेटे के विधायक बनने के बाद उसकी सुनवाई नहीं हो रही है और उसके विरोधियों को एक मंत्री द्वारा शह दी जा रही है। इसी तरह उनहोंने चुनाव में मंत्री द्वारा मदद की बजाय विरोध करने की बात कही। हालांकि घुबाया ने किसी का नाम नहीं लिया। लेकिन घुबाया के आरोपों पर कैप्टन व दूसरे कांग्रेस नेताओं ने चुप्पी साधी हुई है।

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